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द्रौपदी ने सबसे पहले बनाए थे गोलगप्पे, बिहार से भी जुड़ते हैं टेस्टी पानी पूरी के तार

गोलगप्पे यानी पानी पूरी को सिर्फ स्वाद और जायके लिए नहीं खाया जाता है। इसे खाने के कई फायदे भी हैं। गोलगप्पों को खाने से मुंह के छालों से राहत मिल सकती है। इसका इतिहास महाभारत काल से जुड़ा माना जाता है. इसकी गिनती देश के फेवरेट स्ट्रीट फूड में होती है।

@नई दिल्ली शब्द दूत ब्यूरो (20 फरवरी, 2022)

भारत और इसके स्ट्रीट फूड पूरी दुनिया में मशहूर हैं। समोसा, जलेबी, पोहा और कचौड़ी से लेकर कई ऐसी डिश हैं जिन्हें खाने के लिए लोग बजट या पसंदीदा दुकान की दूरी नहीं देखते हैं। बस मन किया और सीधे निकल पड़े। इसी तरह पानी पूरी और चाट पकौड़ी के लिए भी लोगों की दीवानगी कम नहीं है। पानी पूरी यानी गोलगप्पों की बात करें तो वो महिलाओं की पसंदीदा चीज होती है।

दरअसल ये होते ही इतने टेस्टी हैं कि नाम सुनते ही किसी के भी मुंह में पानी आ सकता है। भले ही बाजार में पिज्जा, बर्गर और पाश्ता जैसी विदेशी डिश की मांग बढ़ी हो लेकिन आज भी लोगों के बीच पानी पूरी की दीवानगी कम नहीं है। यह देश के सबसे मशहूर स्ट्रीट फूड में से एक है. तो चलिए आज हम आपको पानी पूरी से जुड़े कुछ मजेदार तथ्य बताते हैं।

बहुत सारे फूड ब्लॉगर्स का मानना है कि पानी पूरी की शुरुआत आज के बिहार और पुरातन काल में मगध क्षेत्र से हुई थी। पानी पूरी को पहली बार मगध में ही बनाया गया था। अलग-अलग राज्यों में पानी पूरी का अलग-अलग नाम से जाना जाता है। इसका पुराना नाम क्या रहा होगा ये कहना जरा मुश्किल है लेकिन इसका एक पुराना नाम ‘फुल्की’ भी बताया जाता है।

आपकी फेवरेट पानी पूरी को भारत में अलग अलग नाम से जाना जाता है। उत्तर प्रदेश में खासकर अवध बेल्ट में इसे पानी के बताशे के नाम से जाना जाता है। यूपी के अलावा इसे कहीं पर पताशी भी कहा जाता है। कुछ जगहों पर गुपचुप, गोलगप्पे, फुल्की और पकौड़ी भी कहा जाता है।

प्राचीन समय की बात करें तो मान्यता ऐसी भी है कि एक बार कुंती अपनी नई बहू द्रौपदी का परीक्षण करना चाहती थीं। इसी के चलते उन्होंने द्रौपदी को थोड़ा सा आटा और आलू देकर कहा था की इससे कुछ ऐसा बनाओ की पांडवों का पेट भर जाए। ऐसा माना जाता है कि द्रौपदी ने कम सामग्री का इस्तेमाल करके पानी पूरी बनाया था।

परिवर्तन प्रकृति का नियम है. जो समय के साथ नहीं बदलते हैं वो मिट जाते हैं। आपकी टेस्टी पानीपूरी भी इस नियम से अछूती नहीं है। कुछ इसी फंडे के चलते पूरे भारत में पानी पूरी का स्वाद भी लगातार बदला है। उसके चटपटे पानी के कई फ्लेवर आ चुके हैं।

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