देश के सबसे चहेते उद्योगपतियों में से एक रतन टाटा की बायोग्राफी छापने का अधिकार पाने के लिए दुनियाभर के पब्लिशिंग हाउसेज में होड़ मची हुई थी। इससे पहले दिग्गज क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर की जीवनी को छापने के लिए ऐसी होड़ नजर आई थी।
@नई दिल्ली शब्द दूत ब्यूरो (09 जनवरी, 2022)
वैसे तो देश के सबसे चहेते उद्योगपतियों में से एक रतन टाटा का जीवन खुले पन्ने की तरह है लेकिन फिर भी देश-दुनिया के लोग उनकी निजी जिंदगी से जुड़े हर पहलू को जानने के लिए बेकरार रहते हैं। यही वजह है कि उनकी अधिकृत जीवनी को छापने के लिए दुनियाभर के पब्लिशिंग हाउसेज में होड़ मच गई। आखिरकार ब्रिटिश पब्लिशर हार्परकॉलिंस ने सबको पछाड़ते हुए यह डील अपने नाम कर ली।
सूत्रों के मुताबिक हार्परकॉलिंस ने टाटा संस के चेयरमैन रतन टाटा की बायोग्राफी छापने के लिए भारत के इतिहास की सबसे बड़ी नॉन-फिक्शन डील साइन की है। यह किताब नवंबर 2022 में आएगी। माना जा रहा है कि इसमें टाटा की महत्वाकांक्षी नैनो परियोजना, टाटा संस के पूर्व चेयरमैन साइरस मिस्त्री के साथ विवाद और ब्रिटिश कंपनी कोरस के अधिग्रहण के बारे में कई चीजें निकलकर सामने आ सकती हैं।
1937 में जन्मे रतन नवल टाटा 1961 में कपंनी से टाटा ग्रुप से जुड़े थे और 1991 में टाटा संस के चेयरमैन बने थे। उनकी लीडरशिप में कंपनी ने कई ऊंचाइयां हासिल की। इस दौरान टाटा ग्रुप ने कोरियाई कंपनी डेवू, लंदन की कंपनी टेटले टी, जगुआर लैंड रोवर और स्टील कंपनी कोरस ग्रुप का अधिग्रहण किया।
रतन टाटा की इस आधिकारिक जीवनी के लेखक पूर्व आईएएस अधिकारी डॉ थॉमस मैथ्यू हैं। भारत में यह किताब हार्परकॉलिंस इंडिया अंग्रेजी और दूसरी प्रमुख भारतीय भाषाओं में प्रकाशित करेगी। अमेरिका में इसे हार्परकॉलिंस लीडरशिप और ब्रिटेन में विलियम कॉलिन्स छापेगी। हालांकि इस किताब पर फिल्म या वेब सीरीज बनाने के अधिकार लेखक के पास ही रहेंगे।
हालांकि हार्परकॉलिंस ने इस बात का खुलासा नहीं किया कि उसने पब्लिशिंग राइट्स कितने में खरीदे हैं लेकिन बिजनस अखबार मिंट ने सूत्रों के हवाले से बताया कि इस किताब के प्रिंट, ऑडियोबुक और ई-बुक फॉर्मेट के वैश्विक अधिकार के लिए दो करोड़ रुपये से अधिक की बोली लगाई गई थी।
रतन टाटा की जीवनी लिखने का मौका पूर्व नौकरशाह थॉमस मैथ्यू को मिला है। पिछले कुछ वर्षों के दौरान उन्हें रतन टाटा के फोटो, प्राइवेट पेपर्स और पत्रों का एक्सेस रहा है। मैथ्यू इससे पहले दो किताबें ‘अबोड अंडर दि डॉम’ और ‘दि विंग्ड वंडर्स ऑफ राष्ट्रपति भवन’ लिख चुके हैं।
इससे पहले देश में दिग्गज क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर की जीवनी छापने के लिए बहुत ज्यादा होड़ देखने को मिली थी। सचिन की बायोग्राफी ‘प्लेइंग इट माइ वे’ साल 2014 में आई थी जिसे हचैट इंडिया ने छापा था। अमूमन पब्लिशिंग हाउसेज लेखक से राइट्स लेने के लिए एडवांस अमाउंट देते हैं। किताब की बिक्री से पैसों की वसूली होने के बाद लेखक को रॉयल्टी मिलनी शुरू होती है। यह राशि सेल्स प्राइस की 5 से 15 फीसदी के बीच होती है।
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