उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर हो रहीं रैलियों में कोविड प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया जा रहा है। सोशल डिस्टैंसिंग सहित कोरोना से बचाव के अन्य मानकों की जमकर धज्जियां उड़ रही हैं।कांग्रेस, भाजपा या समाजवादी पार्टी हो, इनकी रैलियों में उमड़ रही भीड़ में बहुत कम ही लोग मास्क पहने नजर आते हैं।
@नई दिल्ली शब्द दूत ब्यूरो (29 दिसंबर, 2021)
देश में एक बार फिर से कोरोना के मामले बढ़ने लगे हैं। कोरोना के नए वैरिएंट ओमिक्रॉन के खतरे के बीच कई राज्यों ने अपने यहां पाबंदियां लगानी शुरू कर दी हैं। लेकिन उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर हो रहीं रैलियों में कोविड प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया जा रहा है। सोशल डिस्टैंसिंग सहित कोरोना से बचाव के अन्य मानकों की जमकर धज्जियां उड़ रही हैं।कांग्रेस, भाजपा या समाजवादी पार्टी हो, इनकी रैलियों में उमड़ रही भीड़ में बहुत कम ही लोग मास्क पहने नजर आते हैं। सोशल डिस्टैंसिंग तो पूरी तरह नदारद है।
कांग्रेस की महिला मैराथन हो या उन्नाव में अखिलेश यादव की रैली, यहां कोविड प्रोटोकॉल का पालन होता नहीं दिखा। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के हरदोई में रोड शो में भी लोग कोविड के खतरे को लेकर बेपरवाह नजर आए। बता दें कि कोरोना महामारी के दौरान उत्तर प्रदेश सबसे ज्यादा प्रभावित राज्यों में से एक था। गंगा में मिले लाशों ने मीडिया में सुर्खियां बटोरी थीं और उत्तर प्रदेश सरकार की खूब किरकरी हुई थी। बता दें कि राज्य में 30 प्रतिशत से भी कम आबादी को पूरी तरह से टीका लगाया गया है।
गौरतलब है कि देशभर में बढ़ते कोरोना के मामलों के मद्देनजर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने चुनाव आयोग और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से यूपी चुनाव टालने और रैलियों पर तुरंत पाबंदी लगाने का का आग्रह किया था। दरअसल, हाईकोर्ट के जज ने कहा था कि जान है तो जहान है। अगर रैलियों को नहीं रोका गया तो परिणाम दूसरी लहर से भी बदतर होंगे। यूपी चुनाव एक से दो महीने टाले जाएं। चुनावी रैलियों पर फौरन पाबंदी लगे।
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