मशीन के आगे की तरफ अलग-अलग आकार के एक्सक्लूडर्स लगे हैं, जिसकी मदद से गोबर मनचाहे आकर में बदल जाता है। बाद में, इसे सुखाकर इस्तेमाल में लिया जाता है।
@नई दिल्ली शब्द दूत ब्यूरो (10 दिसंबर, 2021)
आमतौर पर लोग दूध के लिए, मवेशी पालन करते हैं। इसके अलावा, मवेशियों का गोबर का भी,कई कामों में उपयोग होता है। लेकिन गोबर का ठीक से प्रबंधन करना, मवेशी पालकों की सबसे बड़ी चुनौती होती है। अक्सर आपने देखा होगा कि गौशाला में गोबर का ढेर बन जाता है और लोग समझ नहीं पाते कि इसका करें क्या।
यदि गोबर को अच्छे से इस्तेमाल में लिया जाए, तो यह खेतों में खाद बनाने से लेकर, बायो गैस बनाने तक में काम आ सकता है। गोबर की इसी खूबी को पहचानकर, पंजाब के 31 वर्षीय कार्तिक पाल ने इससे जुड़े एक नहीं, बल्कि तीन आविष्कार किए हैं।
कार्तिक ने सबसे पहले 2017 में गोबर से लकड़ी बनाने की मशीन बनाई थी। जो फेसबुक और सोशल मीडिया के जरिए देशभर में इतनी हिट हुई कि अब तक वह 9000 मशीनें बेच चुके हैं। इसके बाद, इसी साल उन्होंने गोबर सुखाने की मशीन बनाई है, जो कुछ ही मिनटों में गीले गोबर से पानी अलग करके पाउडर बना देती है।
कार्तिक हमेशा अपनी मशीनों की डिलीवरी के लिए गौशाला और किसानों के पास जाते रहते थे। इसी दौरान, एक दिन उन्हें गोबर से लकड़ी बनाने की मशीन का ख्याल आया। उन्होंने बताया कि एक बार वह पटियाला स्थित गौशाला में चाफ कटर की डिलीवरी के लिए गए थे। उन्होंने वहां गोबर का ढेर देखा। गौशाला के लोग भी इस समस्या से परेशान थे।
कार्तिक कहते हैं, “मुझे आज भी याद है कि उस दिन गौशाला से निकलते ही, मुझे एक आटे की सेवइयां बनाने वाला मिला था। अक्सर पंजाब में लोग घर पर ही आटे से सेवइयां बनवाते हैं। सेवइयां बनाने वाले की मशीन को देखकर ही, मुझे गोबर से लकड़ी बनाने की मशीन का ख्याल आया था।”
उन्होंने अपनी फैक्ट्री में ही सेवइयां बनाने की मशीन का एक बड़ा रूप तैयार किया। यह आटा चक्की की मशीन की तरह काम करती है। इसमें वह दो से चार दिन पुराना गोबर इस्तेमाल करते हैं, जिसमें नमी थोड़ी कम हो। उसके बाद मशीन के आगे की तरफ अलग-अलग आकार के एक्सक्लूडर्स लगे हैं, जिसकी मदद से गोबर मनचाहे आकर में बदल जाता है। बाद में, इसे सुखाकर इस्तेमाल में लिया जाता है।
उनका तीसरा आविष्कार है, गोबर उठाने की ऑटोमैटिक मशीन, जिस पर फ़िलहाल वह काम कर रहे हैं। लेकिन बाकी की दोनों मशीनों को बेचकर, उन्होंने अपने कंपनी के टर्नओवर को करोड़ों रुपये तक पहुंचा दिया है।
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