@नई दिल्ली शब्द दूत ब्यूरो (22 नवंबर, 2021)
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में हुई किसान महापंचायत में किसानों ने कहा कि खेती के काले क़ानून वापस करना ही काफ़ी नहीं है, जब तक एमएसपी गारंटी क़ानून नहीं बनता और पहले से तैयार किसान विरोधी विधेयक रद्द नहीं किए जाते तब तक उनका आंदोलन चलता रहेगा।
लखनऊ की किसान महापंचायत में बड़ी तादाद में किसान जुटे। खेती के नए कानून वापस लेने के प्रधानमंत्री के ऐलान के बाद यह किसानों की पहली महापंचायत थी। संयुक्त किसान मोर्चा में शामिल तमाम संगठनों के किसान यहां पहुंचे। पंचायत में किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा कि किसानों की मांगें हैं कि काला कृषि कानून वापस हो, एमएसपी गारंटी कानून बने, बिजली संशोधन विधेयक वापस हो, बीज विधेयक का ड्राफ्ट रद्द हो, पराली जलाने को अपराध से बाहर करें और दस साल से पुराना ट्रैक्टर चलाने की छूट हो।
टिकैत ने कहा कि अभी सिर्फ़ एक मांग पूरी हुई है। बाकी मांगों पर सरकार उनसे बात शुरू करे। उन्होंने कहा कि ”जो कुछ कानून या बिल पार्लियामेंट में रखे हुए हैं, यह कभी भी ला सकते हैं उसको। उस पर एक बार और चर्चा कर लो। जैसे सीड बिल है, बिजली, इलेक्ट्रिसिटी बिल है। पॉल्यूशन वाला है, दूध का है, भूमि का है। वे किसानों की जमीनें छीनने का काम कर रहे हैं।”
राकेश टिकैत ने कहा कि पीएम मोदी ने भले नए कृषि क़ानून लाने के लिए देश से माफी मांग ली हो, लेकिन बीजेपी नेताओं का एक वर्ग शुरू से ही किसानों को देशद्रोही बताता रहा है, वह अब भी अपनी बात पर क़ायम है।
उधर, बीजेपी के सांसद साक्षी महाराज ने कहा कि ”तथाकथित किसानों के अपवित्र गठजोड़ में उनके मंच से पाकिस्तान ज़िंदाबाद, खालिस्तान ज़िंदाबाद जैसे अपवित्र नारे लग रहे थे। तो मोदी जी के लिए भारतीय जनता पार्टी के लिए प्रथम राष्ट्र है। बिल तो बनते रहते हैं, वापस होते रहते हैं, फिर बन जाएंगे, कोई देर नहीं लगती है।”
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