@नई दिल्ली शब्द दूत ब्यूरो (06 नवंबर, 2021)
एयर इंडिया के टाटा सन्स के पास जाने के बाद माननीयों की दिक्कत बढ़ गई है। एयरलाइन्स अब बकाया किराया मांग रही है। इस बीच राज्यसभा ने अपने सदस्यों से एयर इंडिया का बकाया चुकाने के लिए हवाई यात्रा के अपने बिलों का जल्द से जल्द निपटान करने को कहा है।
एयर इंडिया के टाटा सन्स के पास जाने के बाद ‘माननीयों’ की दिक्कत बढ़ गई है। वह बकाया मांग रही है। इस बीच, राज्यसभा ने अपने सदस्यों से एयर इंडिया का बकाया चुकाने के लिए हवाई यात्रा के अपने बिलों का जल्द से जल्द निपटान करने को कहा है। उच्च सदन के सचिवालय ने सदस्यों को लिखे अपने पत्र में कहा कि एयर इंडिया ने एक्सचेंज ऑर्डर के बदले हवाई टिकटों की खरीद के लिए क्रेडिट सुविधा देना बंद कर दिया है जो अतीत में प्रचलन में था।
पत्र में कहा गया है, सदस्यों से अनुरोध है कि वे समिति की बैठकों में भाग लेने के उद्देश्य से राज्यसभा या लोकसभा सचिवालय द्वारा पहले से जारी विनिमय आदेशों के विरुद्ध खरीदे गए मूल हवाई टिकट और बोर्डिग पास के साथ निर्धारित प्रपत्र में अपने यात्रा भत्ते के दावे प्रस्तुत करें। उनके निपटान और एयर इंडिया के बकाए के भुगतान के लिए जल्द से जल्द राज्यसभा सचिवालय को दौरे (टूर का ब्यौरा) प्रस्तुत किए जाने चाहिए।
राज्यसभा द्वारा जारी पत्र में यह भी कहा गया है कि एयर इंडिया से हवाई टिकट अगले निर्देश तक नकद में खरीदे जा सकते हैं। केंद्र ने राष्ट्र के स्वामित्व वाली एयर इंडिया का टाटा संस में विनिवेश कर दिया है और बकाया राशि सौंपने और निकासी की प्रक्रिया चल रही है।
वित्त मंत्रालय ने 27 अक्टूबर, 2021 को सभी केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों को एक पत्र लिखा, जिसमें उन्हें एयर इंडिया के प्रति अपना सारा बकाया तुरंत चुकाने का निर्देश दिया गया था, जिसमें कहा गया था कि कर्ज में डूबे राष्ट्रीय वाहक को टाटा संस ने खुली बोली में अपने अधिकार में ले लिया है।
बता दें कि जुलाई 2009 में, वित्त मंत्रालय के तहत व्यय विभाग ने सरकारी अधिकारियों को निर्देश दिया था कि केंद्र सरकार द्वारा भुगतान की जाने वाली छुट्टी यात्रा रियायत (एलटीसी) सहित घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय दोनों मार्गो के लिए हवाई यात्रा केवल एयर इंडिया से होगी।
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