@शब्द दूत ब्यूरो (02 नवंबर, 2021)
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में प्रियंका गांधी की ओर से 40 फीसदी टिकट महिलाओं को देने के ऐलान का असर उत्तराखंड में भी दिखने लगा है। उत्तराखंड में महिलाएं हाथ से न निकल जाएं इसलिए बीजेपी ने भी ‘बड़ा दांव खेल दिया है।
उत्तराखंड में चुनाव से ठीक पहले उत्तराखंड में ‘मुख्यमंत्री घस्यारी कल्याण योजना’ की शुरुआत
इस योजना का क्रेडिट लेने के लिए पुष्कर सिंह धामी और धन सिंह रावत के बीच होड़ दिख रही है। यही नहीं, खबरों की कतरनें जोड़कर योजना को त्रिवेंद्र सिंह की सौगात बताने संबंधी पोस्टर भी दिखाई दे रहे हैं।
उत्तराखंड में चुनाव से ठीक पहले महिला मतदाताओं को ध्यान में रखकर ‘मुख्यमंत्री घस्यारी कल्याण योजना’ की केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शनिवार को शुरुआत की। शुरू से ही इस योजना का क्रेडिट लेने के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और सहकारिता मंत्री धन सिंह रावत के बीच होड़ दिख रही है।
पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत भी इस योजना का श्रेय लेने में शामिल हो गए। पुराने अखबारों की खबरों की कतरनें जोड़कर योजना को त्रिवेंद्र सिंह की सौगात बताने संबंधी पोस्टर चारों तरफ देखे गए । केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मुख्यमंत्री घस्यारी कल्याण योजना का श्रेय धन सिंह रावत को दिया, जबकि प्रदेश संगठन कह रहा है कि यह योजना बीजेपी की है।
इस योजना के तहत पशुपालक परिवार की हर महिला को राज्य सरकार की ओर से किट दी जाएगी, जिसमें दो कुदाल, दो दरांती, एक पानी की बोतल और एक खाने का टिफिन शामिल होगा। इस किट की कीमत करीब 1500 रुपये होगी। वैसे तो योजना में उत्तराखंड के गांवों में 7771 सहकारी केंद्रों के माध्यम से कम दरों पर चारे की बिक्री की भी बात है, लेकिन राजनीतिक विवाद किट और योजना के नाम को लेकर है।
इससे विपक्ष को यह कहने का मौका मिला है कि जब देश-दुनिया की महिलाएं लड़ाकू विमान उड़ाने की तैयारी कर रही है तो उत्तराखंड में बीजेपी महिलाओं को सिर्फ कुदाल और दरांती तक ही सीमित कर देना चाहती है।
कांग्रेस के चुनाव अभियान के प्रमुख हरीश रावत का कहना है कि देश की महिलाएं अपने घर के कामों के साथ ही खेत में काम करती हैं, लेकिन उनके काम के आधार पर उन्हें संबोधित नहीं दिया जाना चाहिए। योजना का नाम घस्यारी रखना महिलाओं का अपमान है। रावत ने कहा कि जिस राज्य की पहचान बछेंद्री पाल, जियारानी, तीलू रौतेली, गौरा देवी जैसी महिलाओं से हो, वहां की महिलाओं की पहचान बीजेपी घस्यारी तक सीमित कर देना चाहती है।
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