@नई दिल्ली शब्द दूत ब्यूरो (30 सितंबर, 2021)
बिहार में एक ओर जहां भ्रष्टाचार की बलिवेदी पर नीतीश सरकार की ‘हर घर जल, हर घर नल’ भी फेल साबित हो रही है। तो दूसरी ओर बिहार को समृद्ध बनाने के लिए नहरों का जाल बिछा कर कृषि कार्य को मजबूत करने की सरकार की तथाकथित पहल भी भ्रष्ट पदाधिकारियों, बिचौलियों एवं दलालों के कारण दम तोड़ रही है।
फौलादी हौसलों के साथ बिहार ही नहीं बल्कि देश के लिए लौंगी भुईयां उर्फ लोंगिया मांझी ने मिसाल कायम की है। बिहार के जिस इलाके में आजादी के 70 वर्ष से भी ऊपर बीत जाने के बाद बुनियादी सुविधाएं नहीं पहुंची है, वहां के लोगों के जीवन में लौंगी मांझी खुशहाली का पर्याय बन कर अवतरित हुए हैं।
नक्सलवाद और उग्रवाद की गोद में बसे बिहार के गया जिले के सुदूरवर्ती पहाड़ी और जंगली इलाकों में 70 वर्षीय लौंगी भुईंया ने न सिर्फ जीने की राह आसान की है बल्कि लोगों का हौसला भी बढ़ाया है।
गया जिले के बांके बाजार के कोठिलवा गांव के रहने वाले लौंगी मांझी ने 30 वर्षों तक लगातार कुदाल और फ़व्वाड़े चलाकर नहर खोद डाली। पहाड़ियों से निकलने वाली जलस्रोत को खेत और खलिहानों की ओर मोड़ने के लिए उन्होंने पहाड़ काटकर पांच किलोमीटर लंबी नहर खोद डाली। मांझी की बदौलत, बरसात का पानी जो जंगल में बरबाद हो रहा था, अब नहर से होकर खेतों में पहुंचने लगा है।
जुनून के पक्के और लक्ष्य के धुनी 70 वर्षीय लौंगी मांझी ने जब नहर खोदने का संकल्प ठाना था, तब लोग इन्हें पागल समझते थे। लेकिन आज उनकी कोशिशों ने इलाके से होनेवाले पलायन को रोक दिया है। अब इस गांव के युवा और बेरोजगार काम की तलाश में बिहार के बाहर नहीं जाते हैं बल्कि गांव में ही नहर के पानी से खेती कर जीविकोपार्जन करने लगे हैं।
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