@शब्द दूत ब्यूरो (17 जुलाई, 2021)
उत्तराखंड के लोकपर्व हरेला घी संग्रांद के अवसर पर धाद की ओर से देहरादून के मालदेवता स्थित स्मृति वन में प्रख्यात पर्यावरणविद स्व. सुंंदर लाल बहुगुणा, साहित्यकार लालबहादुर वर्मा, मथुरादत्त मठपाल, प्रेमलाल भट्ट के अलावा सामाजिक कार्यकर्ता पंकज सिंह महर की याद में पौधे रोपे गए। धाद के कुछ सहयोगियों ने भी अपने प्रियजनों की स्मृति में पौधारोपण किया।
धाद के अध्यक्ष लोकेश नवानी और महासचिव तन्मय ममगाईं ने लोगों से हिमालयी अन्न का अधिकाधिक उपयोग करने का आह्वान किया ताकि पहाड़ से हो रहे पलायन को रोका जा सके और उत्तराखंड की धरती को हरा-भरा बनाया जा सके। एक माह तक चलने वाले इस कार्यक्रम के दौरान हिमालयी सरोकारों पर आनलाइन वार्ता का आयोजन भी किया जाएगा।
स्मृति वन की संयोजक शोभा रतूड़ी ने सभी लोगों से अपने दिवंगत स्वजनों के निमित्त पौधा लगाने की अपील की, ताकि छायादार और फलदार पेड़ के रूप में उनकी स्मृति चिरस्थायी बनी रह सके। मंजू काला ने पहाड़ी भोजन पर विस्तार से चर्चा की। फंची के संयोजक किशन सिंह ने पहाड़ी अन्न की खरीद के लिए लोगों को प्रेरित किया।
एक कोना कक्षा का कार्यक्रम के संयोजक गणेश उनियाल ने हरेला स्कूल पुरस्कार योजना के बारे में बताया।इसके तहत पांच विद्यालयों को पर्यावरण संरक्षण के लिए अच्छा काम करने के लिए 21-21 सौ रुपये का नकद पुरस्कार और प्रशस्ति पत्र से सम्मानित किया जाएगा।
प्रख्यात लोकगायिका माधुरी बड़थ्वाल और रेखा उनियाल ने मांगल गायन से कार्यक्रम की शुरुआत की। इस अवसर पर धाद साहित्य एकांश की संयोजक डा. विद्या सिंह, कल्पना बहुगुणा, शांतिप्रकाश जिज्ञासू, लक्ष्मी प्रसाद बडोनी, विकास बहुगुणा, प्रोफेसर एम सी सती, सुमति बडोनी, राजेश्वरी सेमवाल, राजीव पांथरी, प्रभाकर देवरानी, वीरेंद्र खंडूरी, पुष्पलता ममगाईं, कांता घिल्डियाल, साकेत रावत, कुलदीप कंडारी, इंदु भूषण सकलानी, हरेंद्र असवाल, श्रीमती सुषमा असवाल, विनोद आदि मौजूद थे। संचालन रविंद्र नेगी ने किया।
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