@वेद भदोला
माननीय केजरीवाल जी,
उत्तराखंड के लिए 300 यूनिट मुफ्त बिजली की चुनावी घोषणा के लिए धन्यवाद। किसानों को भी मुफ्त बिजली मिलेगी, जानकर सुखद अनुभूति हुई। चौबीसों घंटे बिजली मिलेगी, ये जानकर दिल बाग-बाग हो गया। फिलहाल, बिजली का शॉक लगाकर और अगले महीने फिर से नई घोषणाओं के साथ दुबारा उत्तराखंड आने की बात कहकर आपने उत्तराखंड, विशेषकर यहां के पहाड़ी इलाकों के लोगों के मन में कुछ सवाल पैदा जरूर कर दिए हैं। अगली बार जब उत्तराखंड आएं तो इन सवालों के जवाब भी ढूंढकर लाने की कोशिश जरूर कीजियेगा।
फिलहाल, पहाड़ में रोजगार के नाम पर एक बड़ा सा शून्य दिखाई देता है। राज्य बनने इन बीस वर्षों में राज करने वाली सरकारें इस मुद्दे पर निल बटा निल ही हैं। वो तो कुछ युवा अपने दम पर स्वरोजगार की अलख जगाए हुए हैं। वरना, तो अभी तक सरकारें इस मुद्दे पर आंखें मूंदें ही बैठी हुई हैं। बताइएगा कि आप कैसे इस समस्या से निबटेंगे।
केजरीवाल साहब, क्या आप जानते हैं कि पहाड़ में आज भी प्रसूताएं सड़क पर बच्चे जनने को अभिशप्त हैं। राज्य की बीमार स्वास्थ्य सेवाओं की हालत ये है कि ज्यादातर अस्पतालों में एक अदद डॉक्टर तक उपलब्ध नहीं है। राज्य के दूरस्थ प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में पेरासिटामोल जैसी बेसिक दवाइयों का ही टोटा है। बताइएगा कि इस बीमार व्यवस्था का क्या इलाज है आपके पास।
केजरीवाल जी, आपने उत्तराखंड के स्कूलों को दिल्ली की तर्ज़ पर भव्य बना देने का सपना तो दिखा दिया। लेकिन, पढ़ाने के लिए मास्टर कहां से लाएंगे। क्योंकि उत्तराखंड में तो ‘सुगम बनाम दुर्गम’ के नाम पर अध्यापकों में हमेशा ही तलवारें खिंची रहती हैं। बताइएगा कि बच्चों की बेहतर पढ़ाई के लिए पलायन को रोकने के लिए आपके पास क्या योजना है।
बाकी, पहाड़वासियों के पास अपना मोबाइल चार्ज करने और शाम को सीरियल देखने लायक बिजली तो दे ही रही है सरकार, और क्या चाहिए। साथ ही ये भी सनद रहे कि केवल हरिद्वार, उधमसिंह नगर या नैनीताल ही उत्तराखंड नहीं है।
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