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काशीपुर :एन एच 74 के लिए अधिग्रहित भूमि का मुआवजा न मिलने से किसान ने दी परिवार संग आत्महत्या की धमकी, सदमे से दो भाईयों की हो चुकी है मौत

@शब्द दूत ब्यूरो (12 जुलाई 2021)

काशीपुर। सरकार द्वारा अधिग्रहण की गई भूमि का आधा मुआवजा न मिलने पर एक किसान ने परिवार सहित आत्महत्या कर लेने की धमकी दी है। पीड़ित किसान की भूमि वर्ष 2013 में एन एच 74 के लिए अधिग्रहित की गई थी।

परेशान किसान परिवार ने सोशल मीडिया पर पत्रकारों को एक पत्र भेजा है पत्र में उसने कहा है कि प्रशासन व एनएचआई के अधिकारी आदेश के बाद भी उसका पूरा मुआवजा नहीं दे रहे हैं। जिसके चलते उनके सामने आर्थिक संकट गहरा गया है। उच्चाधिकारियों से गुहार लगाने के बाद भी उनकी कोई भी मदद नहीं कर रहा है। जिसमें उन्होंने कहा है कि अगर समय रहते उनके मुआवजे का भुगतान नहीं किया गया, तो वह परिवार सहित आत्महत्या करने को बाध्य होंगे। जिसकी पूरी जिम्मेदारी राजस्व विभाग और एनएचएआई के अधिकारियों की होगी।

ग्राम बांसखेड़ा निवासी महिपाल सिंह पुत्र दिग्विजय सिंह की गिन्नी खेड़ा में लगभग साढ़े 3 एकड़ जमीन है। जिसको की फोरलेन निर्माण के चलते 2013 में उनकी लगभग ढाई एकड़ जमीन राजस्व विभाग ने अधिग्रहण कर ली थी। अधिग्रहित भूमि के मुआवजे के रूप में आधा भुगतान चार साल बाद 2017 में उनको मिला। इस दौरान उनके छोटे भाई हरगोविंद सिंह कि 2016 में हार्ट अटैक के चलते मौत भी हो गई। जो कि मुआवजा समय से ना मिलने के चलते बहुत ही अवसाद ग्रस्त थे। 

महिपाल सिंह ने बताया कि न्यायालय आर्बिट्रेटर उधम सिंह नगर ने 5 फरवरी 2021 को सक्षम प्राधिकारी उधम सिंह नगर  उनका समुचित मुआवजा 9% वार्षिक ब्याज की दर से भुगतान करने को आदेश दिया था लेकिन 6 माह बीतने के बाद भी राजस्व विभाग और एनएचआई के अधिकारी न्यायालय के आदेशों का पालन नहीं कर रहे हैं।

उन्होंने 21 जून को एसडीएम काशीपुर को भी एक पत्र सौंपा था। जिसमें उन्होंने आदेशों का हवाला देते हुए जल्द भुगतान करवाने की अपील की थी। जिसके बाद एसडीएम काशींपुर ने एक नोटिस एनएचआई के अधिकारियों को भेजा था। जिसमें उनको 23 जून को कार्यालय में उपस्थित होने को बोला था। लेकिन 23 तारीख को एनएचआई का कोई भी अधिकारी नहीं पहुंचा। चूंकि इस मामले में लगभग 4 साल का समय बीत गया है और अधिकारियों की मान मनोव्वल और गुहार लगाने के बाद भी उनका भुगतान नहीं हो सका। साथ ही ढाई एकड़ जमीन के अधिग्रहण व बची हुई जमीन भी खेती योग्य नहीं बची। जिसके चलते परिवार की आंखें गहरा आर्थिक संकट गहराया हुआ है। जल्द से जल्द भुगतान न होने की दशा में उन्होंने परिवार सहित आत्मदाह करने की बात पत्र में कही है।

इस बीच मुआवजा न मिलने से उसके दो भाई सदमे से मर चुके हैं।  अशोक कुमार पुत्र दिग्विजय सिंह की दिल का दौरा पड़ने पर 31 जनवरी 2012 को मौत हो गई । जबकि सबसे छोटे भाई हरगोविंद सिंह की भी भूमि का अधिग्रहण कर लेना व मुआवजा न मिलने के सदमे में 20 नंवबर 2016 को दिल का दौरा पड़ने से मृत्यु हो गई । महिपाल पुत्र दिग्विजय सिंह के संयुक्त परिवार में बड़े भाई स्व. अशोक कुमार की पत्नी सुशीला देवी, बेटा विपिन, राहुल व विपिन की पत्नी मनीता और महीपाल व उनकी पत्नी अनीता देवी, बेटा भुवनेश, बेटी चारु तथा स्व. छोटे भाई की 15 वर्षीय बेटी अक्षिता, 13 वर्षीय बेटा आयुष बीमारी से ग्रसित होने के साथ ही 80 वर्षीय मां राममूर्ति समेत 12 सदस्यों का परिवार आत्महत्या करने को मजबूर है। 

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