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कैबिनेट से निशंक की विदाई को लेकर पहले ही सोशल मीडिया पर कारण बता दिया गया था। दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर व दिल्ली यूनिवर्सिटी टीचर्स एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष श्रीराम ओबरॉय ने 1 जुलाई को एक फेसबुक पोस्ट की थी। पोस्ट में उन्होंने साफ तौर पर शिक्षा मंत्रालय में भ्रष्टाचार और दलालों के बोलबाले के चलते बड़ी बात कही थी।
इस फेसबुक पोस्ट में प्रो.ओबरॉय ने सनसनीखेज खुलासा किया था उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक के बारे में दावा किया था कि उन्हें प्रधानमंत्री ने जबरन छुट्टी पर भेज दिया है। प्रो.ओबरॉय लिखते हैं कि उनके (मंत्री के) विरुद्ध ढेर सारे आरोप लगाए गए हैं और मामले में उच्च स्तर पर विचार चल रहा है। प्रो.ओबरॉय ने यह भी लिखा कि उनके रहने के दौरान मंत्रालय दलालों के चंगुल में था। अपनी पोस्ट में प्रो.ओबरॉय ने दावा किया कि मुख्य सतर्कता आयुक्त ने हाल में राष्ट्रपति से मुलाक़ात करके मंत्री के विरुद्ध जांचे-परखे दस्तावेज़ कार्यवाही हेतु सौंपे हैं। प्रोफेसर ओबरॉय ने तो पोस्ट में यहाँ तक लिखा था कि उन (निशंक) से कहा गया है कि वे तभी मंत्रालय आयें, जब उन्हें बुलाया जाये, लगता है आज उन्हे इस्तीफा देने बुला लिया गया। बीते रोज हुये मंत्रीमंडल विस्तार से पूर्व निशंक के इस्तीफे के बाद भी प्रोफेसर ओबरॉय ने अपनी पुरानी पोस्ट को उदाहरण देते हुए अपनी बात की पुष्टि की है।
उधर हरिद्वार से सासंद डॉ रमेश पोखरियाल निशंक के विरूद्ध एक याचिका हाईकोर्ट में है जिसमें उन के खिलाफ उत्तराखंड हाई कोर्ट में कोई सरकारी देयता का झूठा शपथ पत्र देने के साथ-साथ राष्ट्रपति के यहां भी भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व राज्यमंत्री मनीष वर्मा की याचिका लगी हुई है । भाजपा नेता मनीष वर्मा का मानना है कि जिसमे रमेश पोखरियाल निशंक का निर्वाचन रद्द होगा क्योंकि माननीय उत्तराखंड हाई कोर्ट ही रमेश पोखरियाल के खिलाफ पूर्व में ही सरकारी देनदारी घोषित कर चुका है ।


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