@नई दिल्ली शब्द दूत ब्यूरो
ब्लैक फंगस के बाद अब एक और नई समस्या खड़ी हो गई है। दरअसल, कोविड से ठीक होने के बाद मरीजों में ‘एवैस्कुलर नेक्रोसिस’ यानी ‘बोन डेथ’ के मामले देखने को मिल रहे हैं। ये एक ऐसी मेडिकल कंडिशन है, जिसमें इंसान की हड्डियां कमजोर होने और फिर सड़ने-गलने लगती हैं। इस बीमारी का मुख्य कारण भी स्टेरॉयड है। जीवन रक्षक स्टेरोईड अब कोविड से ठीक हुए कई मरीजों में ऐसी दिक्कतें पैदा कर रहा है।
अब पोस्ट कोविड मरीज़, ‘एवैस्कुलर नेक्रोसिस’ यानी ‘बोन डेथ’ नाम की बीमारी के साथ मुंबई के अस्पतालों में पहुंच रहे हैं। एवैस्कुलर नेक्रोसिस एक ऐसी बीमारी है जिसमें हड्डियों तक पहुंचने वाले खून की सप्लाई स्थायी या अस्थायी रूप से बंद हो जाती है। जिसके कारण हड्डियों के टिशू मर जाते हैं और हड्डियां कमज़ोर पड़ना और गलना शुरू कर देती हैं।
हिंदुजा, फ़ोर्टिस, जसलोक, वोकहार्ट, सायन जैसे मुंबई के कई बड़े अस्पताल ऐसे मरीज़ देख रहे हैं और स्टेरॉयड को एक बड़ा फैक्टर मान रहे हैं। हिंदुजा ने पिछली लहर से कुल 19 मरीज देखे, जिनमें से सिर्फ इस साल 16, तो वोकहार्ट हर हफ्ते दो मरीज देख रहा है।


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