@शब्द दूत ब्यूरो
उत्तराखंड में कांग्रेस विपक्ष में जरूर है पर सत्ताधारी भाजपा के मुकाबले काफी कमजोर साबित हो रही है। जिस तरह से भाजपा कांग्रेस नेताओं पर लगे आरोपों पर मुखर होकर विरोध करती है। उसके विपरीत कांग्रेस भाजपा पर हमला कर पाने में सक्षम नजर नहीं आती है।
बीते रोज भाजपा विधायक पर लगे रेप के आरोप को लेकर कांग्रेस भाजपा को घेर पाने में फिसड्डी साबित हो गई है। प्रदेश उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्मान का एक बयान जरूर मीडिया में तैर रहा है लेकिन लगता है कि अपने अंतर्द्वंद्व में घिरी कांग्रेस इस मामले को तूल देने में दिलचस्पी नहीं दिखा पा रही। इस समय कांग्रेस के पास अवसर है कि वह राज्य की राजनीतिक अस्थिरता पर भाजपा को घेर सकती है। मुद्दे बहुत हैं पर उन मुद्दों को लेकर कांग्रेस जनता के बीच अपनी पैंठ बनाने में कामयाब होती नहीं दिख रही है।
दरअसल 10 विधायकों में से नेता प्रतिपक्ष चुनने में कांग्रेस के भीतर की अंतर्कलह जग जाहिर हो गयी है। ऐसे में क्या 2022 के चुनावों में उतरने से पहले उत्तराखंड कांग्रेस जनता के बीच जाकर अपने द्वारा निभाई गई कमजोर विपक्षी भूमिका के सहारे सत्ता पाने का सिर्फ ख्वाब ही देख सकती है।
कांग्रेस के पास चेहरे बहुत हैं लेकिन आम भाषा में कहा जाये तो टांग खींचने वालों की भी बहुतायत है। हर कोई कांग्रेस का बड़ा नेता है।
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