@नई दिल्ली शब्द दूत ब्यूरो (01 जुलाई, 2021)
उत्तराखंड कांग्रेस में नेता प्रतिपक्ष और प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी को लेकर घमासान जारी है। प्रीतम और हरीश खेमे की लड़ाई दिल्ली दरबार पहुंच चुकी है। फिलहाल, दोनों ही खेमे सोनिया गांधी और राहुल गांधी से मिलना चाहते है। लेकिन, दोनों ही नेताओ ने इन्हें अभी मिलने का समय नहीं दिया है।
दिल्ली में मचे घमासान के बीच अब यह निकलकर आ रहा है कि मामला सिर्फ एक कुर्सी का नहीं है। नेता प्रतिपक्ष की कुर्सी के साथ ही प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष की कुर्सी के लिए भी खींचतान मची है। कांग्रेस स्पष्ट रूप से दो खेमों में बंटी हुई नजर आ रही है। दिल्ली में जुटे दिग्गजों के बीच इस मुद्दे को लेकर बैठकों के कई दौर तो चल रहे हैं, लेकिन फिलहाल कोई नतीजा नहीं निकल पाया है।
बहरहाल, बैठकें तो नेता प्रतिपक्ष की कुर्सी को लेकर हो रही है, लेकिन आने वाले दिनों में प्रदेश कांग्रेस का चेहरा-मोहरा सब कुछ बदलने के संकेत मिल रहे हैं। कुर्सी की दौड़ में शामिल कांग्रेस नेताओं को चुनावी साल में पार्टी प्रदेश अध्यक्ष और कांग्रेस विधायक मंडल दल के नेता की कुर्सी की अहमियत मालूम है। इसलिए पार्टी के दो प्रमुख ध्रुव इन दोनों पदों के लिए ताकत लगा रहे हैं।
इधर, राज्य में कांग्रेस दो ताकतवर खेमों में साफ बंटी नजर आ रही है। हरीश रावत खेमा चाहता है कि प्रीतम सिंह कांग्रेस अध्यक्ष की कुर्सी छोड़ें और नेता प्रतिपक्ष की कमान संभालें। लेकिन प्रीतम सिंह खेमा किसी भी सूरत में यह नहीं चाहता कि उनके नेता अध्यक्ष की कुर्सी छोड़ें। हरीश खेमा कुर्सी के इस संघर्ष को उस हद तक पहुंचा देना चाहता है, जहां पार्टी आलाकमान इन दोनों ओहदों में से कोई एक ओहदा उसकी झोली में डालने के लिए मजबूर हो जाए।
सियासी जानकारों का कहना है कि टिकटों के बंटवारे से लेकर सीटों का गणित बैठाना काफी हद तक इन दोनों पदों पर बैठे नेताओं के हाथ में होता है। ऐसे में खांटी नेता पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत पार्टी की पूरी बागडोर अपने हाथ में लेना चाहते हैं। जबकि प्रीतम सिंह कुर्सी छोड़ने को तैयार नहीं हैं।
पार्टी सूत्रों की मानें तो हरीश खेमे के इस प्रस्ताव पर प्रीतम ने पद छोड़ने से साफ इनकार कर दिया। उन्होंने नेता प्रतिपक्ष तो छोड़ो कोई भी पद लेने से साफ इनकार कर दिया। ऐसे में अब दोनों गुट पूरी तरह से एक-दूसरे के आमने-सामने हैं।
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