की शुद्धता की गारंटी देने वाली हॉलमार्किंग अनिवार्य रूप से चरणबद्ध तरीके से लागू हो गई है। सरकार का कहना है कि शुरू में यह देश के 256 जिलों में लागू होगा। सोने के दो ग्राम से कम वजन के आभूषणों के साथ कुंदन, पोलकी औऱ जड़ाऊ ज्वेलरी को भी अभी हॉलमार्क से बाहर रखा गया है।
सरकार ने कहा है कि ज्वेलर्स पुरानी सोने की ज्वेलरी को खरीदना जारी रख सकते हैं। सरकार के मुताबिक, पुरानी ज्वेलरी को भी हॉलमार्क कराया जा सकता है, अगर इसे दोबारा पिघलाकर नए आभूषणों में बदला जाता है तो।
भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) वर्ष 2000 से ही गोल्ड ज्वेलरी की हॉलमार्किंग की योजना चला रहा है। एक अनुमान के मुताबिक, भारत में करीब 4 लाख ज्वेलर्स हैं, जिनमें से करीब दस फीसदी ही योजना लागू होने के पहले पंजीकृत थे। भारत में हर साल 700-800 टन सोने का आय़ात किया जाता है।
ग्राहकों के लिए सोने की शुद्धता पर मानक दरों को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से सोने के आभूषणों की हॉलमार्किंग को अनिवार्य किया गया है। सोने के आभूषणों पर हॉलमार्किंग एक शुद्धता का पैमाना है, जो अभी तक स्वैच्छिक रहा है। हॉलमार्किंग का मतलब है कि सोने को अब मानक दरों पर बेचा जा सकता है और हॉलमार्क के मुकाबले सोने का एक समान मूल्यांकन होगा।
इस पहल से सोने के आभूषण खरीदते समय लोगों को धोखाधड़ी से बचाया जा सकेगा और ग्राहकों को ज्वेलरी की शुद्धता की गारंटी मिलेगी। ज्वैलर्स को सिर्फ 14, 18 और 22 कैरेट के आभूषण बेचने की अनुमति होगी। हॉलमार्किंग के लिए 20, 23 और 24 कैरेट के सोने की भी अनुमति होगी।
सरकार का कहना है कि सोने के आभूषणों की विश्वसनीयता, ग्राहकों की संतुष्टि और उपभोक्ता संरक्षण को बढ़ाने के लिए हॉलमार्किंग की जरूरत है। अब तक केवल 40 फीसदी सोने के आभूषणों पर हॉलमार्क था।:



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