संस्कृत के महान कवि और कई महाकाव्य ग्रंथों के रचियता महाकवि कालिदास का जन्म स्थान उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जनपद का कविल्ठा नामक गांव है। यहीं पर कालिदास ने अमर महाकाव्यों कुमारसंभवम, मेघदूत औऱ रघुवंशम की रचना की थी।
अपने आरंभिक जीवन काल में कालिदास अनपढ़ और मूर्ख रहे थे। लेकिन अयोग्य होने के कारण पत्नी द्वारा अपमानित किए जाने और घर से निकाले जाने पर उन्होंने अपनी योग्यता का विस्तार किया और एक दिन देश के महान महाकवि कालिदास बन गए। हालांकि बाद में वह विक्रमादित्य के दरबार के नवरत्नों में से एक बन गये थे।
कालिदास संस्कृत भाषा के महान कवि और नाटककार माने जाते हैं। उन्होंने भारत की पौराणिक कथाओं और दर्शन को आधार बनाकर रचनाएं की और उनकी रचनाओं में भारतीय जीवन और दर्शन के विविध रूप और मूल तत्त्व निरूपित हैं। कालिदास अपनी इन्हीं विशेषताओं के कारण राष्ट्र की समग्र राष्ट्रीय चेतना को स्वर देने वाले कवि माने जाते हैं। कालिदास वैदर्भी रीति के कवि हैं और तदनुरूप वे अपनी अलंकार युक्त किन्तु सरल और मधुर भाषा के लिये विशेष रूप से जाने जाते हैं।
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