@शब्द दूत ब्यूरो
उत्तराखंड में 2022 में होने वाले विधानसभा चुनावों में भाजपा असम वाला फॉर्मूला अपना सकती है। फिलहाल केंद्रीय स्तर पर राज्य के लिए चुनावी रणनीति में विभिन्न पहलुओं पर विचार किया जा रहा है, जिसमें एक फॉर्मूला यह भी है। यानी भाजपा राज्य में बिना मुख्यमंत्री के चेहरे के चुनाव मैदान में उतरेगी।
उत्तराखंड में अगले साल फरवरी में चुनाव होने हैं इस लिहाज से अब केवल लगभग आठ महीने का समय ही बचा है। पार्टी ने हाल में ही नेतृत्व परिवर्तन कर अपनी चुनावी रणनीति को अमलीजामा पहनाने की कोशिश की थी लेकिन नया नेतृत्व भी उसकी उम्मीदों पर खरा नहीं उतर पा रहा है। इसके अलावा कोरोना से बने हालात ने भी पार्टी की चिंता बढ़ाई हुई है। उत्तराखंड में भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला होता रहा है, हालांकि इस बार आम आदमी पार्टी भी चुनाव मैदान में है।
में मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत के नेतृत्व वाली सरकार को लेकर केंद्र में किसी तरह की नाराजगी तो नहीं है, लेकिन चुनाव के समय जिस तरह की रणनीति की जरूरत होती है उसमें दिक्कत आ सकती है। वैसे भी हाल में मुख्यमंत्री के कुछ बयानों को लेकर पार्टी असहज रही है। पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के बयान भी असहज करने वाले रहे हैं। ऐसे में एक बार और नेतृत्व परिवर्तन करने के बजाय वह विधानसभा चुनाव में बिना किसी चेहरे के जा सकती है।
किसी एक चेहरे पर दांव न लगाने के पीछे एक रणनीति यह भी मानी है कि भाजपा में मुख्यमंत्री पद के लगभग आधा दर्जन दावेदार हैं और लगभग सभी अपने-अपने क्षेत्र के मजबूत नेता हैं। ऐसे में पार्टी सामूहिक नेतृत्व के फार्मूले के साथ आगे बढ़ सकती है। उत्तराखंड छोटा राज्य होने के बाद भी राजनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण है। यहां पर भाजपा का सीधा मुकाबला कांग्रेस से है। हालांकि, आम आदमी पार्टी की मैदान के कुछ क्षेत्रों में उभार पर भी नजर है, लेकिन फिलहाल वह सत्ता के लिए दावेदारी की दौड़ में कहीं नजर नही आती।

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