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वैक्‍सीन की कमी पर दिल्ली हाईकोर्ट की केंद्र को फटकार, कहा-अदालतें नाराजगी जता रहीं लेकिन आप नहीं जाग रहे

@नई दिल्ली शब्द दूत ब्यूरो

देश में वैक्सीन की कमी को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट की तीखी टिप्पणी की है। हाईकोर्ट ने कहा कि कोविड-19 ने एक भी परिवार को नहीं बख्शा है और तब भी केंद्र सरकार के अधिकारी जमीनी हकीकत से बेखबर अपने ‘आईवरी टावरों‘ में  रह रहे हैं। भारत में स्पूतनिक V टीके के उत्पादन से देश को टीकों की कमी को दूर करने का एक अवसर मिल रहा है।

दिल्ली हाईकोर्ट ने महामारी के हालात से निपटने को लेकर केंद्र से नाराजगी जताते हुए कहा, ‘भगवान इस देश को बचाए। स्पूतनिक V टीके के उत्पादन के लिए पैनासिया बायोटेक की रशियन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट फंड के साथ साझेदारी को इस अवसर के रूप में देखा जाना चाहिए कि यहां इसका उपयोग हो और ऐसे मामलों में उच्च अधिकारियों से 30 मिनट के भीतर निर्देश प्राप्त किये जाएं।’ 

हाईकोर्ट ने कहा, ‘जब सरकार के पास लाखों टीकों की खुराक प्राप्त करने का अवसर है तब भी कोई दिमाग नहीं लगा रहा है जबकि सरकार को इसे एक अवसर के तौर पर अपनाना चाहिए, अन्यथा मौतें होती रहेंगी।’

कोर्ट ने कहा कि हर दिन सभी अदालतें आपसे नाराजगी जता रही हैं और तब भी आप नहीं जाग रहे। कौन सा नौकरशाह आपको निर्देश दे रहा है? क्या उसे हालात की जानकारी नहीं है? भगवान देश को बचाए। कोर्ट ने कहा, ‘क्या आपका अफसर देश में इतनी बड़ी संख्या में हो रही मौतों को नहीं देख पा रहा। टीकों की भी कमी है। आपके मुवक्किल को हालात की जानकारी नहीं है।’ 

इस मुद्दे पर केंद्र के रुख की आलोचना करते हुए कोर्ट ने कहा, ‘आपके पास टीकों की इतनी कमी है और आप इस पर ध्यान नहीं दे रहे। यह आपके लिए अवसर हो सकता है। इतने नकारात्मक मत होइए। यह आग भड़काने जैसा है और किसी को कोई फिक्र नहीं है।’ कोर्ट  ने दिल्ली की पैनासिया बायोटेक की याचिका पर सुनवाई करते हुए ये टिप्पणियां कीं।

दरअसल पैनासिया ने 2020 के एक मध्‍यस्‍थता अवार्ड मामले में दिए आदेश में संशोधन करने की मांग की है। कंपनी ने अपने नए आवेदन में मध्यस्थ अवार्ड के रिलीज की मांग की है और कहा है कि इसे मानवता के बड़े हित में जल्द से जल्द धन की आवश्यकता है क्योंकि यह पहले से ही आरडीआईएफ के सहयोग से कॉविड वैक्सीन स्‍पूतनिक V की टेस्टिंग बैचों का निर्माण कर चुका है और आगे इनके उत्पादन की  प्रक्रिया की जानी है। हाईकोर्ट ने केंद्र को नोटिस जारी किया है और 31 मई तक जवाब मांगा है।

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