@नई दिल्ली शब्द दूत ब्यूरो
चौंकिए मत, ये किसी अस्पताल के अहाते का दृश्य नहीं है। ये हक़ीक़त है दिल्ली से महज़ 80 किलोमीटर दूर ग्रेटर नोएडा के मेवला गोपालगढ़ गांव की। लोग बीमार हैं, अस्पताल में जगह नहीं लिहाज़ा यहां नीम के पेड़ के नीचे टहनियों से बांध कर ड्रिप लगाकर मरीज़ों को दवा दी जा रही है।
फेफड़ो में इंफेक्शन है, कोरोना पॉज़िटिव हैं और मटीज यहां इस तरह इलाज करवा रहे हैं। कुछ मरीजों का कहना है कि अस्पताल में हालत और भी ख़राब है। यहां उन्हें ठीक लगता है। अस्पताल की हालत को देखते हुए गांव के लोगों ने मरीज़ों के लिए घरों में ही ऑक्सीजन सिलिंडर लगा लिए हैं।
गांव के प्रधान योगेश तालान के मुताबिक स्वास्थ विभाग की टीम यहां पहुंची ही नहीं। लोग मरने पर मजबूर हैं पर प्रशासन कुछ नहीं कर रहा है। सब राम भरोसे पड़े हुए हैं। झोला छाप डॉक्टर का ही बस आसरा है।
उधर जेवर इलाके के स्वास्थ्य अधिकारी मेडिकल ऑफिसर इंचार्ज डॉक्टर पवन इससे इनकार करते हैं। उनका दावा है कि इस इलाके में हर रोज़ क़रीब 800 रैपिड एंटीजन और 600 आरटीपीसीआर टेस्ट किए जा रहे हैं। हालांकि आसपास के 38 गांवों को लिये ये टेस्टिंग भी काफ़ी कम है। 

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