@नई दिल्ली शब्द दूत ब्यूरो
भोपाल। पिछले साल जब कोरोना के मामले बढ़ने लगे तब देश को वेंटिलेटर्स की याद आई। पहले भारत में ज्यादातर वेंटिलेटर्स विदेशों से आते थे, वहां की संस्थाओं से प्रमाणित, लेकिन पीएम केयर फंड से पिछले साल 2000 करोड़ रुपये के वेंटिलेटर खरीद की बात हुई, इसे ‘मेड इन इंडिया’ का नारा दिया गया। लेकिन हालत यह है कि आज मध्य प्रदेश-छत्तीसगढ़ में ऐसे कई वेंटिलेटर धूल खा रहे हैं। कई अस्पतालों में तो डॉक्टरों ने लिख दिया कि ये वेंटिलेटर इतने घटिया हैं कि वे इससे काम नहीं कर सकते।
भोपाल का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल, हमीदिया अस्पताल। यहां एक कोरोना मरीज़ को कोविड वार्ड-3 में भर्ती किया गया। वेंटिलेटर पर रखा गया लेकिन परिजनों ने बताया कि 3 मई को वेंटिलेटर अचानक बंद हो गया, जिससे मरीज की मौत हो गई। अस्पताल मशीन से मौत की बात नकारता रहा, लेकिन अस्पताल प्रशासन को घटना से कुछ दिन पहले लिखे एक पत्र ने इसकी पोल खोल दी। इसमें साफ कहा गया था कि पीएम केयर फंड से मिले वेंटिलेटर गड़बड़ हैं, न ऑक्सीजन फ्लो आता है, न प्रेशर बनता है, चलते-चलते मशीन बंद हो जाती है. ऐसे में मरीज की जान बचाना मुश्किल है।
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