@शब्द दूत ब्यूरो
जबलपुर। नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन मामले का आरोपी विहिप नेता पुलिस से बचने के लिए बीमारी का बहाना बनाकर अपने ही अस्पताल के आईसीयू में भर्ती हो गया। लेकिन पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया है।
सरबजीत सिंह मोखा वीएचपी का जबलपुर जिलाध्यक्ष था। रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी में नाम सामने आने के बाद संगठन ने इसे सभी पदों से हटा दिया है। वहीं, मोखा के संबंध कई बड़े नेताओं से भी हैं। इसकी कई तस्वीर सामने आई है। पिछले दिनों कोविड केयर सेंटर के लिए मोखा ने रेडक्रॉस को 11 लाख रुपये का दान दिया था।
पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस ने सिटी अस्पताल के मालिक सरबजीत सिंह मोखा को गिरफ्तार कर लिया है। मोखा के अस्पताल में भर्ती कोविड मरीजों को नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन लगे हैं। गिरफ्तारी से बचने के लिए वह बीमारी का बहाना बना रहा था। पुलिस सोमवार की रात इसके अस्पताल भी गई थी लेकिन यह नहीं मिला था।
दरअसल, सरबजीत सिंह मोखा के तार गुजरात के मोरबी में बनी नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन से जुड़े हैं। जबलपुर से गिरफ्तार दवा व्यवसायी ने सरबजीत सिंह मोखा का नाम लिया था। उसके बाद इसने कहा था कि मुझे फंसाने की कोशिश की जा रही है। पुलिस जांच में मोखा के खिलाफ सबूत मिले हैं। इसके बाद सरबजीत सिंह मोखा पर पुलिस ने मामला दर्ज किया था।
गुजरात के मोरबी में ग्लूकोज और नमक से नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन तैयार हुए थे। पुलिस जांच में यह बात सामने आई कि 500 इंजेक्शन जबलपुर में खपाए गए हैं। मामले में पकड़े गए आरोपियों ने ही सरबजीत सिंह मोखा के सिटी अस्पताल का नाम लिया था । पुलिस ने बताया कि हम यह भी जांच कर रहे हैं कि नकली इंजेक्शन की वजह से किन-किन मरीजों की मौत हुई है।

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