आप विधायक सौरभ भारद्वाज कोरोना से जंग जीतकर आ चुके हैं। एक विधायक होने के बावजूद उन्होनें दिल्ली के हॉस्पिटल्स का रोंगटे खड़े कर देने वाला नज़ारा देखा। उन्हीं के शब्दों में आप भी जानिए कि आखिर क्या-क्या झेल रहे हैं अस्पतालों में भर्ती कोरोना मरीज।
मैं कोरोना नेगेटिव तो हो गया हूं लेकिन अभी कमज़ोरी काफ़ी है। मेरे फेफड़े अपनी पूरी क्षमता से काम नहीं कर रहे, अभी अगर मैं सीढ़ियां चढ़ता उतरता हूं तो मेरी सांस फूल जाती है और ऐसा लगता है कि शरीर में ऑक्सीजन कम हो गई है। डॉक्टर कह रहे हैं कि रिकवरी में अभी थोड़ा समय लगेगा। मेरे रिश्तेदारों से मेरी बेटी को हुआ, फिर मुझे और पत्नी को हुआ, मुझे लगता था मैं पूरी तरह फिट हूं अगर कोरोना हुआ भी तो भी कोई डरने की बात नहीं.इस बीमारी के बारे में सबसे खतरनाक बात ही ये है कि इसके बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता।
जब ये बीमारी आई थी तो शुरुआत में इसके बारे में अपने दोस्तों के बीच मैंने बहुत पैनिक फैलाया था क्योंकि मेरे बहुत सारे दोस्त विदेशों में हैं और वहां यह फैला हुआ था और मैं उनसे इसके बारे में सुनता था। पहली वेव जब हमारे देश में आई तब लगता था कि विदेशी लोग कमजोर हैं और हम लोग बहुत मजबूत हैं क्योंकि हमने काढा पी रखा है, हम अदरक और लहसुन खाते हैं तो हम बहुत स्ट्रांग हैं हमको नहीं होगा। इस मिसकनसेप्शन की वजह से हमको लगता था कि अगर हमको हुआ भी तो ठीक हो जाएंगे। अब ऐसे लगता है कि आप को कोरोना से इतना तो डरना चाहिए कि ये किसी को भी कितना भी बड़ा नुकसान पहुंचा सकता है।
जवान आदमी को अपने ऊपर एक झूठा आत्मविश्वास होता है कि कोरोना हमको क्या करेगा?मुझे 13 अप्रैल को लक्षण आने शुरू हुए और 19 अप्रैल तक डॉक्टर से सलाह लेकर घर में रह रहा था। बुखार आने पर दवाई लेता था और बुखार उतर जाता था। मैं हॉस्पिटल में एडमिट नहीं होना चाहता था लेकिन आतिशी ने बार-बार कहा कि हॉस्पिटल में एडमिट हो जाओ। मैं कुछ टेस्ट कराने के लिए अपोलो हॉस्पिटल गया था। सीटी स्कैन में पाया गया कि मेरे फेफड़ों में कोरोना बहुत फैल गया है।
इत्तेफ़ाक़ है कि उसी शाम से मेरा ऑक्सीजन लेवल गिरने लगा। उन्होंने मुझे ऑक्सीजन सपोर्ट दिया लेकिन इसके लेवल को बढ़ाने की बार-बार जरूरत पड़ती रही। अगले दो दिन में मेरी हालत यह हो गई कि मेरा ऑक्सीजन लेवल कंट्रोल नहीं हो पा रहा था और मुझे लगातार बुखार था, इसके बाद आईसीयू में शिफ़्ट किया गया, वो एक अलग ही दुनिया होती है। आईसीयू में रहने के दौरान आपके पास खबर आ रही होती है कि आपके जानने वाला यह शख्स गुजर गया या कोई मर गया तो आपको उन सब की शक्ल याद आ रही होती है। इस दौरान आपको लगता है कि कांग्रेस, बीजेपी या आम आदमी पार्टी, इसकी खिंचाई उसकी खिंचाई यह सब बहुत छोटी चीजें हैं।
आईसीयू में रहने के दौरान मैंने 22 अप्रैल को अपना वीडियो शूट किया और ट्विटर पर डाला। हमारा एक व्हाट्सएप ग्रुप है जिस पर लगातार अपडेट आती रहती हैं कि यह हॉस्पिटल में ऑक्सीजन खत्म हो गया या उस हॉस्पिटल में इतने घंटे की ऑक्सीजन रह गई है। ऑक्सीजन की सही कीमत आप ऑक्सीजन बेड पर रहने के दौरान ही समझ पाते हैं, मुझे बहुत अजीब लग रहा था कि अस्पतालों के अंदर ऑक्सीजन खत्म हो रही है। कोई अस्पताल कह रहा है कि उसके पास सिर्फ 2 घंटे की ऑक्सीजन बची है तो यह बहुत बड़ी बात है क्योंकि उसके पास अगले 2 घंटे में ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाएगी।
ऐसे में जो मरीज एडमिट हैं उनको उस अस्पताल में लोअर ऑक्सीजन पर रखा जाएगा, इससे मरीज तड़पते हैं और हो सकता है बहुत सारे मर भी जाएं। इस बात की लिखा-पढ़ी नहीं होती लेकिन इतना मुझे पता है कि अगर आपको 14 लीटर ऑक्सीजन चाहिए और आप पांच लीटर पर आ गए हो तो इसके परिणाम बहुत गंभीर होंगे। मैंने वह वीडियो मैसेज इसलिए जारी किया क्योंकि मुझे लगता था कि यह लड़ाई बहुत बड़ी है और हालात बहुत खराब है यह वक्त इस बात के लिए नहीं है कि केंद्र सरकार दिल्ली सरकार को नहीं दे रही है।
आप यह सोचकर देखिए कि दिल्ली के अस्पतालों में भी जो लोग मर रहे हैं वह केंद्र सरकार के आईएएस अधिकारियों के रिश्तेदार भी मर रहे हैं, जजों के परिवार वाले भी मर रहे हैं बीजेपी के भी लोग बहुत सारे मरे हैं, कांग्रेस के लोग भी मरे होंगे, आम आदमी पार्टी के लोग भी मरे होंगे तो मौत तो आपसे कहीं भी पक्षपात कर ही नहीं रही। इसके बाद भी हमको अगर यह बात समझ में नहीं आ रही कि हम को मिलकर काम करना चाहिए तो हम सबसे बड़े मूर्ख हैं। भगवान का बहुत बड़ा आशीर्वाद है और बड़ी बात है कि मुझे बेड मिल गया मेरे लिए ऑक्सीजन उपलब्ध हो पाई, वरना कितने सारे लोगों को बेड और ऑक्सीजन नहीं मिल पा रही थी।
बाकी बीमारी से अगर मौत होती है तो आप स्वीकार कर लेते हैं लेकिन कोरोना से हुई मौत को आप स्वीकार नहीं कर पाते क्योंकि यह बहुत तेजी से आपके आदमी को लेकर चला जाता है। मेरे कुछ करीबी लोग एक डेढ़ दिन से मेरे लिए किसी अस्पताल में इंतजाम करने में लगे हुए थे। आतिशी और जास्मिन दोनों एक डेढ़ दिन मेरे लिए लगे थे। इन्होंने मेरे लिए यह इंतजाम कराया कि 4 से 6 घंटे में मेरे टेस्ट अपोलो हॉस्पिटल में हो जाएं। भगवान के आशीर्वाद और आतिशी- जास्मिन के प्रभाव से मुझे सही समय पर ऑक्सीजन मिल गई लेकिन बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि हमारे देश में बहुत सारे लोग ऐसे हैं जिनको यह नहीं मिल पाया।
हॉस्पिटल में रहने के दौरान और अब मेरा मन डॉक्टर, नर्स और वार्ड बॉय के लिए बहुत श्रद्धा से भर गया है। यह लोग बहुत बड़ा काम कर रहे हैं। पैंसठ साल का डॉक्टर खुद आईसीयू में आ रहा है जहां पर इतना वायरल लोड है और वह मरीज से पूछ रहा है और उसको दवा दे रहा है क्या लिख रहा है यह अपने आप में ही बहुत बड़ा साहस है। नर्स मरीजों की सेवा में लगी हुई हैं। अभी तक हम डॉक्टर नर्स आदि के लिए बहुत समर्थन में बोलते थे लेकिन जब मैं खुद देख कर आया तो सच में लगा कि यहां बहुत साहस का काम कर रहे हैं हमारे डॉक्टर नर्स और वार्ड बॉय पूरा स्टाफ़।

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