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प्रसंगवश :पंचायत चुनाव में करारी हार के बावजूद योगी आदित्यनाथ को सीएम बनाये रखना भाजपा की मजबूरी

@शब्द दूत ब्यूरो

उत्तर प्रदेश के पंचायत चुनावों के नतीजे क्या भाजपा के लिए खतरे की घंटी है? हालांकि भाजपा इसे मानने को तैयार नहीं होगी। लेकिन नतीजों में जिस तरह से सपा और बसपा ने पंचायत चुनाव में जीत हासिल की है वह तो इसी ओर इशारा कर रहे हैं कि लोग अब भाजपा से मुंह मोड़ रहे हैं। उत्तर प्रदेश के धार्मिक महत्व वाले इलाकों में अपनी कट्टर हिन्दूवादी छवि के बावजूद भाजपा की करारी हार बता रही है कि जनता को मूलभूत सुविधाएं भी चाहिए।

बंगाल में भाजपा ने काफी शोर मचाया था। यहाँ तक कि भाजपा के पिछले सात आठ वर्षों के देश भर के चुनावों में बेहतर प्रदर्शन के आधार पर पर यह कहा जाने लगा था कि बंगाल में भाजपा सरकार बनने जा रही है। लेकिन वहाँ के मतदाताओं ने बता दिया कि आखिर लोकतंत्र की असली शक्ति जनता होती है। उसके तुरंत बाद उत्तर प्रदेश के पंचायत चुनावों में भाजपा को वहां की ग्रामीण जनता ने आइना दिखा दिया। हालांकि किसान आंदोलन में केन्द्र सरकार की किसानो के प्रति भूमिका इन नतीजों का प्रमुख कारण मानी जा रही है। 

यूपी की ओर देखें तो ज्यादातर जगहों पर भाजपा और उसके समर्थित उम्मीदवारों को पराजय का मुंह देखना पड़ा है।  पीएम नरेंद्र मोदी और सीएम योगी आदित्यनाथ के संसदीय क्षेत्र में भाजपा की करारी हार अपने आप में अहम है।

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मेरठ, सहारनपुर, बिजनौर, अलीगढ़, आगरा, बागपत और शामली जैसे इलाकों में समाजवादी पार्टी का प्रभुत्व तथा वाराणसी और गोरखपुर के आलावा यूपी की राजधानी लखनऊ तक में भाजपा को जनता के गुस्से का सामना करना पड़ा है। पड़ोसी राज्य उत्तराखंड में तमाम उपचुनाव में जीत के बावजूद वहाँ मुख्यमंत्री बदल दिया जाता है। जबकि इसके विपरीत उत्तर प्रदेश में हार के बाद भी सीएम बदलने का साहस भाजपा नहीं कर सकती। वहाँ योगी आदित्यनाथ पार्टी से ऊपर का चेहरा हैं ठीक वैसे ही जैसे नरेंद्र मोदी भाजपा से ऊपर हैं। बता दें कि बंगाल चुनाव में हार के बावजूद पीएम मोदी का दबदबा बरकरार रखने के लिए वहाँ सरकार न बनने से ज्यादा इस बात पर जोर दिया जा रहा है कि तीन से हम कहां पहुंच गये। 

दरअसल योगी आदित्यनाथ को उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री बनाये रखना भाजपा की अब मजबूरी हो गई है। क्योंकि उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनावों में भाजपा की कम सीटें आने का ठीकरा योगी आदित्यनाथ पर नहीं फोड़ सकते। पीएम नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र में भी भाजपा की हालत पतली है।

 

 

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