@शब्द दूत ब्यूरो
नई दिल्ली। देश में कोरोना की टेस्टिंग को लेकर नीति में बदलाव किया गया है। आरटीपीसीआर और रैपिंड एंटीजन की जांच में अगर कोई पॉजिटिव हुआ है तो दोबारा आरटीपीसीआर की जरूरत होगी।
दूसरी ओर, कोरोना से ठीक होकर अस्पताल से डिस्चार्ज होने वालों के आरटीपीसीआर टेस्ट की जरूरत नहीं होगी। अगर कोई अन्तर्राज्यीय यात्रा कर रहा हो और वो स्वस्थ हो उसके आरटीपीसीआर टेस्ट की जरूरत नही होगी। देश मे 2506 लैब हैं। दूसरी लहर में कोरोना के ज्यादा केस आने की वजह से और लैब में काम करने वाले स्टाफ के संक्रमित होने की वजह से टेस्ट को लेकर चुनौती बढ़ गयी है जिसे देखते हुए टेस्टिंग स्ट्रेटजी में बदलाव किया गया है।
कोरोना के केस बढ़ने के कारण अस्पतालों को बेड, दवाओं और ऑक्सीजन की कमी से जूझना पड़ रहा है। कोरोना टेस्ट करने वाले लैब्स पर भी दबाव बढ़ा है। ऑक्सीजन को लेकर स्थिति पर स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से कहा गया है कि निश्चित रूप से चुनौतियां हैं। केसों की संख्या तेजी से बढ़ी है. केंद्र और राज्य इस मामले में मिलकर काम कर रहे हैं. जब अस्पताल इमरजेंसी संदेश भेजते हैं तो यह हर किसी के लिए चुनौतीभरा होता है। हम हर पेशेंट को बचाने की कोशिश कर रहे हैं।

Shabddoot – शब्द दूत Online News Portal