@शब्द दूत ब्यूरो
नई दिल्ली। एनसीटी बिल को लेकर केजरीवाल सरकार और केंद्र के मध्य सियासी घमासान के बीच इसे हरी झंडी मिल गई है। चुनी हुई सरकार की तुलना में केंद्र सरकार के प्रतिनिधि- लेफ्टिनेंट गवर्नर यानी उपराज्यपाल को ज्यादा शक्तियां प्रदान करने वाले इस विवादित बिल को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने मंजूरी दी। इसी के साथ अब यह कानून बन गया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय इस बात की घोषणा करेगा कि ये कानून कब से लागू होगा।
इस बिल को मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की सरकार के लिए बड़े झटके के रूप में देखा जा रहा है। आम आदमी पार्टी का साल 2013 में पहली बार सत्ता में आने के समय से ही उपराज्यपाल से टकराव कई बार सामने आ चुका है।
दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी राज्य क्षेत्र शासन (संशोधन) विधेयक यह स्पष्ट करता है कि दिल्ली में “सरकार” का मतलब उपराज्यपाल है और दिल्ली सरकार को किसी भी कार्यकारी फैसले से पहले उनकी राय लेनी होगी।
राज्यसभा में दो दिन के हंगामे के बाद यह बिल संसद में पास हुआ. इस दौरान, विपक्षी सांसदों ने आरोप लगाया कि यह लोकतंत्र को नष्ट कर देगा। विपक्ष की मांग थी कि बिल को सेलेक्ट कमेटी के पास भेजा जाए।



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