@नई दिल्ली शब्द दूत ब्यूरो
नीति आयोग ने छह सरकारी बैंकों को निजीकरण योजना से बाहर रखा है। इनमें पंजाब नैशनल बैंक, यूनियन बैंक, कैनरा बैंक, इंडियन बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा और एसबीआई शामिल हैं। ये बैंक कंसोलिडेशन के पिछले राउंड का हिस्सा थे। सरकार दो बैंकों और एक जनरल बीमा कंपनी के निजीकरण के बारे में जल्दी ही फैसला करेगी। एक सरकारी अधिकारी के अनुसार ‘जो सरकारी बैंक कंसोलिडेशन एक्सरसाइज का हिस्सा थे, उन्हें निजीकरण योजना से अलग रखा गया है।’
सरकार ने अगस्त 2019 में 10 बैंकों का 4 बैंकों में विलय किया था। इससे देश में सरकारी बैंकों की संख्या 27 से घटकर 12 रह गई थी। ये बैंक अब भी कंसोलिडेशन की प्रक्रिया में हैं और इन्हें निजीकरण योजना में शामिल करना नुकसानदायक हो सकता है। नीति आयोग ने इन बैंकों को निजीकरण योजना से बाहर रखने की सिफारिश की है। वित्त मंत्रालय की भी यही राय है। मंत्रालय इन बैंकों के सिस्टम्स का जल्दी से जल्दी एकीकरण करना चाहता है।
डिपार्टमेंट ऑफ इनवेस्टमेंट एंड पब्लिक एसेट मैनेजमेंट अब इस प्रस्ताव को मंत्रियों के समूह के सामने रखेगा। 2019 की कंसोलिडेशन योजना के मुताबिक ओरियंटल बैंक ऑफ कॉमर्स और यूनाइडेट बैंक ऑफ इंडिया का पंजाब नैशनल बैंक में विलय किया गया। इसी तरह इलाहाबाद बैंक का इंडियन बैंक में, सिंडिकेट बैंक का कैनरा बैंक में और आंध्रा बैंक और कॉरपोरेशन बैंक का यूनियन बैंक ऑफ इंडिया में विलय किया गया। यह विलय मौजूदा वित्त वर्ष से प्रभावी हो गया लेकिन बैंकों को अभी एकीकरण की प्रक्रिया पूरी करनी है।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने बजट भाषण में अगले वित्त वर्ष के दौरान 2 सरकारी बैंकों और एक जनरल इंश्योरेंस कंपनी के निजीकरण का प्रस्ताव रखा था। सरकार ने वित्त वर्ष 2022 के लिए 1.75 लाख करोड़ रुपयेडिपार्टमेंट ऑफ इनवेस्टमेंट एंड पब्लिक एसेट मैनेजमेंट अब इस प्रस्ताव को मंत्रियों के समूह के सामने रखेगा।



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