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किसान आंदोलन से निखरे राकेश टिकैत अब जगह-जगह किसान पंचायत करेंगे

@शब्द दूत ब्यूरो

नई दिल्ली। गाजीपुर बॉर्डर के किसान आंदोलन से ‘निखरे’ राकेश टिकैत अब इस आंदोलन को पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश से निकाल कर देश के दूसरे हिस्सों में भी मजबूत करने में जुटे हैं। इस माह राकेश टिकैत उत्‍तर प्रदेश, हरियाणा, मध्‍य प्रदेश से लेकर महाराष्ट्र तक में पंचायत करेंगे। लेकिन क्या आने वाले दिनों में वह अपने पिता स्वर्गीय महेंद्र सिंह टिकैत जैसी साख और राजपथ जैसा आंदोलन खड़ा कर पाएंगे, यह देखने वाली बात होगी।

चरखी दादरी, जींद, बागपत और अब कुरुक्षेत्र में राकेश लगातार किसान पंचायत कर रहे हैं। वे अब गाजीपुर बॉर्डर पर कम और किसान पंचायत में ज्यादा शिरकत करेंगे। राकेश की योजना फरवरी माह में उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान से लेकर महाराष्ट्र तक दो दर्जन किसान पंचायत करके किसान आंदोलन को पूरे भारत का मजबूत बनाने की है।

गाजीपुर बॉर्डर पर चल रहे किसान आंदोलन के रणनीतिकार ज्यादातर वे बुजुर्ग हैं जो 1988 के किसान आंदोलन में स्वर्गीय महेंद्र सिंह टिकैत के खास रहे हैं। महेंद्र सिंह टिकैत को ‘बाबा टिकैत’ कहकर भी संबोधित किया जाता था। राजपाल शर्मा बीते 36 साल से टिकैत परिवार के खास हैं। 37 बार वे जेल जा चुके हैं और उन पर 40 मुकदमे  दर्ज हैं।

राजपाल शर्मा के अनुसार, बाबा महेंद्र सिंह, राकेश टिकैत को धूम सिंह कहते थे। उन्होंने कहा था कि धूम सिंह किसान आंदोलन को ऊपर लेकर जाएगा। उन्‍होंने बताया कि महेंद्र सिंह टिकैत कहते थे कि अड़ने वालों के पीछे अड़ना मूर्खता है इसी वजह से कई बार बाबा अपने आंदोलन को वापस ले लेते थे।

राकेश टिकैत अब सोशल मीडिया पर भी खासे सक्रिय हैं। गाजीपुर बॉर्डर की सड़क पर बने टेंट में रहने वाले धर्मेंद्र मलिक, राकेश टिकैत का सोशल मीडिया देखते हैं। हाल के दिनों में उनके ट्विटर पर फॉलोअर्स चार हजार से बढ़कर डेढ़ लाख हो गए हैं और फेसबुक पेज की पोस्ट को तीन करोड़ लोग पढ़ चुके हैं। यही वजह है कि राकेश टिकैत पश्चिमी यूपी से निकलकर उत्तरी भारत के बड़े किसान नेता बनते जा रहे हैं।

गौरतलब है कि किसान नेता महेंद्र सिंह टिकैत ने कहा था कि किसान को एक निगाह खेत और दूसरी दिल्ली पर रखनी चाहिए। इसका अर्थ यह था कि किसानों क राजनीतिक तौर पर भी संगठित और मजबूत रहना चाहिए तभी सरकारें उनके हित में काम करेगी। गाजीपुर बॉर्डर पर चल रहा किसान आंदोलन क्या उस दिशा में मील का पत्थर साबित हो पाता है या नहीं, ये भविष्य बताएगा।

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