@शब्द दूत ब्यूरो
नई दिल्ली। कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के आंदोलन के बीच संसद का बजट सत्र चल रहा है। किसानों का दिल्ली की अलग-अलग सीमाओं पर 70 दिन से ज्यादा वक्त से धरना प्रदर्शन जारी है। इस बीच, आंदोलनरत किसानों ने आज चक्का जाम का ऐलान किया है। किसान नेताओं के मुताबिक, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड को छोड़कर समूचे देश में राजमार्गों पर चक्का जाम करने की योजना है। चक्का जाम के मद्देनजर दिल्ली के बॉर्डरों पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई है।
संसद में कृषि कानूनों का बचाव करते हुए कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि प्रदर्शन कर रहे किसान संघों और उनका समर्थन करने वालों में से कोई भी नये कृषि कानूनों में खामियां निकालने में सक्षम नहीं रहा है। कृषि कानूनों का विरोध करने वाले यह बताने को इच्छुक नहीं हैं कि इन ‘काले कानूनों’ में ‘काला’ क्या है, जिसमें सरकार सुधार करे।
वहीं, दूसरी ओर विपक्षी दलों ने नए सिरे से कानून बनाने की मांग की और कांग्रेस के एक सांसद ने मौजूदा कानूनों को किसानों के लिए ‘मौत का फरमान’ बताया। कांग्रेस नेता प्रताप सिंह बाजवा ने नये कृषि कानूनों को किसानों के लिए ‘‘मौत का फरमान” बताया। उन्होंने प्रदर्शन स्थलों पर बनाए गए अवरोधकों की तुलना ‘बर्लिन की दीवार’ से की, जिसका निर्माण देश (जर्मनी) को बांटने के लिए किया गया था।
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