@नई दिल्ली शब्द दूत ब्यूरो
किसान आंदोलन में कल राकेश टिकैत भावुक होकर रोने लगे। जिस वजह से लगभग समाप्ति की कगार पर पहुंचा किसान आंदोलन पुन: जोर पकड़ता नजर आ रहा है। वैसे राकेश टिकैत अकेले नहीं है जो सार्वजनिक रूप से कैमरे पर रोये हैं। पत्रकार से नेता बने आशुतोष राणा, यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और पीएम नरेंद्र मोदी भी कैमरे पर भावुक होकर आंसू बहा चुके हैं। योगी आदित्यनाथ तो संसद में फूट फूट कर रोये हैं।
पहले बात करते हैं पीएम नरेंद्र मोदी की। 2015 के सितंबर में फ़ेसबुक कार्यालय के दौरे पर मोदी अपनी मां को याद करते हुए भावुक हो गए थे। उनका गला भर्रा गया और आंखें नम हो उठीं। इससे पहले संसद में अपने कार्यकाल के पहले दिन भी नरेंद्र मोदी अपने नेता अटलबिहारी वाजपेयी को याद करके भावुक हो उठे थे। लोकसभा चुनाव में प्रचंड जनादेश लेने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब पहली बार संसद पहुंचे तो अपनी भावनाओं को काबू नहीं रख सके।
पूर्व पत्रकार और आम आदमी पार्टी नेता आशुतोष का कैमरे के सामने फूट-फूटकर रोना कम ही लोग भूले होंगे।
वर्ष 2006 में गोरखपुर से बीजेपी सांसद योगी आदित्यनाथ ने अपनी बात रखने के लिए लोकसभा अध्यक्ष से विशेष अनुमति ली थी। तब पूर्वांचल के कई कस्बों में सांप्रदायिक हिंसा फैली थी। जब आदित्यनाथ अपनी बात रखने के लिए खड़े हुए तो फूट-फूट कर रोने लगे। कुछ देर तक वे कुछ बोल ही नहीं पाए और जब बोले तो कहा कि उत्तर प्रदेश की समाजवादी पार्टी की सरकार उनके खिलाफ षड्यंत्र कर रही है और उन्हें जान का खतरा है। 





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