@शब्द दूत ब्यूरो
काशीपुर । उत्तराखंड में डेढ़ साल के भीतर विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में सत्तारूढ़ दल ने तैयारियां तेज कर दी है। काशीपुर विधानसभा क्षेत्र काफी महत्वपूर्ण है। यहाँ से लगातार बीस वर्षों से चार विधानसभा चुनाव भाजपा जीतती आ रही है। हरभजन सिंह चीमा पार्टी के टिकट पर लड़कर विधायक बनते आ रहे हैं।
हालांकि मौजूदा विधायक हरभजन सिंह चीमा को इस बार भी भाजपा से टिकट की उम्मीद है और वह इसके लिए आश्वस्त भी नजर आ रहे हैं। लेकिन एनडीए गठबंधन से उनकी मूल पार्टी अकाली दल के अलग होने के चलते इस बार उनका टिकट खटाई में पड़ रहा है। उधर किसान आंदोलन के चलते विधायक चीमा का खुलकर न बोलना क्षेत्र के किसानों को नागवार लग रहा है। विधायक चीमा भी फिलहाल भाजपा से नहीं बिगाड़ना चाहते हैं। इसलिए वह किसान आंदोलन पर ज्यादा प्रतिक्रिया देने से बच रहे हैं।
सूत्रों की मानें तो इस बार काशीपुर विधानसभा में भाजपा प्रत्याशी बदलने पर विचार कर रही है। हालांकि एक धड़ा हरभजन सिंह चीमा को ही उम्मीदवार बनाने का पक्षधर है। लेकिन अकाली दल के प्रदेश अध्यक्ष पद पर काबिज हरभजन सिंह चीमा को लेकर कुछ पार्टी नेता इसके पक्ष में नहीं हैं। वहीं पिछले बीस वर्षों से काशीपुर में विकास को लेकर गाहे-बगाहे विधायक चीमा पर सवाल उठने लगे हैं।
इधर नगर के एक प्रतिष्ठित चिकित्सक के नाम को लेकर भी मंथन चल रहा है। बताया जा रहा कि केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन के नजदीकी यह चिकित्सक इस बार काशीपुर से भाजपा के प्रत्याशी बन सकते हैं। डॉ यशपाल रावत का सल्ट उपचुनाव लड़ना करीब करीब तय माना जा रहा है। इसी क्रम में काशीपुर से भी एक अन्य चिकित्सक जिनका मुरादाबाद रोड पर नर्सिंग होम है, को भाजपा में विधिवत शामिल कराकर इस बार यहाँ से प्रत्याशी बनाया जा सकता है। 






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