जहां एक ओर ‘नमामि गंगे’ परियोजना के नाम पर सरकारें अरबों रुपया पानी की तरह बहा रही है। वहीं दूसरी ओर अगस्त्यमुनि में गंगा की सहायक नदी मंदाकिनी में नगर पंचायत द्वारा धड़ल्ले से कूड़ा डाला जा रहा है।
केदारनाथ मार्ग पर अगस्त्यमुनि नगर पंचायत की गाड़ियां धड़ल्ले से कूड़ा उड़ेल रही हैं। पत्रकार त्रिलोचन भट्ट के फेसबुक एकाउंट पर मंदाकिनी नदी में कूड़ा डालती नगर पंचायत अगस्त्यमुनि के वाहनों की फ़ोटो वायरल होने के बाद नगर पंचायत में खलबली मची है।
खबर वायरल होने के बाद नगर पंचायत के किसी कथित पदाधिकारी का ऑडियो भी त्रिलोचन भट्ट ने अपनी पोस्ट पर डाला है। ऑडियो में पदाधिकारी बता रहे हैं कि ये जैविक कूड़ा है, जिसे सुअरों के लिए चारे के तौर पर डाला जा रहा है। लेकिन चित्र कुछ और ही हकीकत बयां करते हैं। फोटो में फेंका जा रहा कूड़ा किसी भी सूरत में बायो डिग्रेडेबल यानि जैविक कूड़ा नहीं दिखता।
एक तरफ हमारी सरकारें स्वच्छ और निर्मल गंगा की बात करती है। वहीं दूसरी ओर नगर पंचायत का ये अशोभनीय और गैरकानूनी काम अलग ही कहानी बयां कर रहा है।










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