नए कृषि कानूनों के खिलाफ सड़क पर उतरी कांग्रेस ने अब इसे पार्टीशासित राज्यों में लागू न करने के लिए भी मुहिम छेड़ दी है। कृषि कानूनों को रोकने के लिए कांग्रेसशासित राज्य अपने यहां विधानसभा का विशेष सत्र बुलाएंगे और कानून पारित करेंगे। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने पिछले माह पार्टी के मुख्यमंत्रियों से ऐसी संभावनाएं तलाशने को कहा था, जिससे नए कृषि कानूनों को लागू करने से रोका जा सके।
राज्यों में पेश किए जाने वाले एक विधेयक का मसौदा कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने तैयार कर लिया है और दो विशेष प्रावधानों के साथ इसे पार्टी के शासन वाले राज्यों को भेज दिया है। पहले प्रावधान में राज्य सरकारों को यह केंद्र के कृषि कानूनों को लागू करने की तारीख तय करने का अधिकार होगा। दूसरा प्रावधान है कि किसान, किसी कंपनी, एग्रीग्रेटर के बीच कांट्रैक्ट फार्मिंग न्यूनतम समर्थन मूल्य से नीचे तय नहीं की जा सकती।
हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि कांग्रेस के गठबंधन वाले राज्यों झारखंड और महाराष्ट्र भी इस तरह का विशेष सत्र बुलाएंगे। यह भी तय नहीं है कि गैर भाजपा या गैर कांग्रेसशासित राज्य केरल, बंगाल भी इस रणनीति पर आगे बढ़ेंगे या नहीं। मगर ध्यान देने योग्य बात है कि राज्यों से पारित ऐसे किसी कानून को राष्ट्रपति की मंजूरी मिलना आवश्यक होगी। राष्ट्रपति ऐसे किसी कानून को मंजूरी देने से इनकार कर सकते हैं, लेकिन उन्हें इसकी वजह स्पष्ट करनी होती है।
बता दें कि केंद्र सरकार ने तीन विवादित कृषि विधेयकों को पिछले माह संसद से पारित कराया था। कांग्रेस का आरोप है कि सरकार इन कानूनों के जरिये फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य खत्म कर रही है। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी का कहना है कि नए कानून से किसानों को एमएसपी का हक छिन जाएगा, खासकर सीमांत और छोटे किसानों को इसका बड़ा नुकसान होगा। कारपोरेट और बड़ी कंपनियों को कृषि क्षेत्र में मनमानी की छूट मिल जाएगी।

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