नई दिल्ली। भाजपा के सबसे पुराने सहयोगियों में से एक शिरोमणि अकाली दल ने कहा कि उसने इस महीने के शुरू में विवादास्पद तीन कृषि बिल पर तीखे मतभेदों के बाद सत्तारूढ़ पार्टी बीजेपी के राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) को छोड़ दिया है। अकाली दल के प्रमुख सुखबीर सिंह बादल ने पहले कहा था कि उनकी पार्टी सत्तारूढ़ पार्टी के साथ संबंधों की समीक्षा कर रही है। अकाली दल ने राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद से से किसानों के साथ खड़े होने और विधेयकों पर हस्ताक्षर नहीं करने का अनुरोध किया है।
बता दें कि अकाली दल का आधार पंजाब के किसान ही हैं। पार्टी ने अधिकतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को समाप्त करने की आशंकाओं के चलते नए कानूनों का विरोध किया है और कहा है कि खेती में प्राइवेट प्लेयर छोटे और सीमांत किसानों के लिए मुसीबत पैदा कर देंगे।
इससे पहले अकाली दल नेता सुखबीर बादल ने कहा था कि संसद में अकाली दल ने जिस तरह से इस मुद्दे को उठाया उतना और किसी पार्टी ने नहीं उठाया। यहां तक कि कांग्रेस भी विरोध करने में हमसे पीछे रही। बादल ने कहा कि कांग्रेस के शीर्ष नेता संसद से गायब थे। साथ ही सुखबीर बादल ने कहा कि हमें कैप्टन अमरिंदर से किसान समर्थक होने का कोई सर्टिफिकेट नहीं चाहिए।
शिरोमणि अकाली दल के संरक्षक प्रकाश सिंह बादल ने कहा था कि अकाली ऐसे किसी भी कदम का समर्थन नहीं कर सकते जो किसानों के हितों को नुकसान पहुंचाते हों। इसी के चलते हरसिमरत कौर बादल ने तीन कृषि विधेयकों के विरोध में केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया था।

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