नई दिल्ली। भारत की पतंजलि आयुर्वेद और चीन के बीच गहरे व्यापारिक रिश्तों की शुरुआत दिसंबर 2018 से हैं। देश में रिसर्च और साइंस को बढ़ावा देने के लिए पतंजलि ने तब चीनी फर्म के साथ एक एमओयू साइन किया था । इस एमओयू के तहत चीन की सरकार ने भारत को रिसर्च, योग, कल्चरल प्रोग्राम, एजुकेशन, आईटी जैसे कई क्षेत्रों में काम करने और अपना पूरा सहयोग करने की बात कही थी । यह एमओयू नंदगांव इंडस्ट्रियल पार्क, पतंजलि आयुर्वेदिक लिमिटेड और दो अन्य भारतीय कंपनियों के साथ चीन की सरकार ने साइन किया था ।

पतंजलि आयुर्वेद के एमडी आचार्य बालकृष्ण ने इस एमओयू के बाद आशा जताई थी कि इससे भारतीय संस्कृति, योग, आयुर्वेद और चिकित्सा को हम अब चीन में ला सकते हैं। इसके जरिए हम पूरी दुनिया को लाभ पहुंचा सकते हैं। आचार्य बालकृष्ण ने चीन सरकार के सहयोग और उनकी भावनाओं के लिए धन्यवाद देते हुए चीनी कंपनियों को भी नंदगांव में आने का न्योता दिया।
चीन की तारीफ करते हुए बालकृष्ण ने लिखा , ‘भारत और भारतीय संस्कृति के लिए गौरव का क्षण, चीन के हबेई प्रोविंस के नंदगांव में एडमिनिस्ट्रेटिव कमिटी ऑफ नंदगाव इंडस्ट्रियल पार्क व पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड, भारत व दो अन्य संस्थाओं के बीच एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए, जिसके तहत यहां की सरकार ने भारत की हर तरह की कला, संस्कृति, परंपरा, योग, आयुर्वेद अनुसंधान, जड़ी-बूटी अन्वेषण, योग- केंद्र , टूरिज्म, आईटी ,शिक्षा, मीडिया आदि गतिविधियों के लिए कार्य करने के लिए स्वीकृति दी और सभी संसाधन उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया।’



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