@विनोद भगत
काशीपुर । वरिष्ठ कांग्रेस नेता मुकेश मेहरोत्रा किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। युवावस्था से ही मुकेश काशीपुर में कांग्रेस के मजबूत स्तंभ माने जाते रहे हैं। नारायण दत्त तिवारी की जब कांग्रेस में तूती बोलती थी तो काशीपुर में मुकेश मेहरोत्रा उन चेहरों में से रहे जिनकी उपस्थिति यहाँ कांग्रेस के हर कार्यक्रम में अवश्य होती थी। काशीपुर के पूर्व पालिकाध्यक्ष रह चुके मुकेश मेहरोत्रा यहाँ लगातार कांग्रेस की हार के साक्षी भी हैं। यहाँ यह भी बता दें कि मुकेश मेहरोत्रा एक बार निर्दलीय भी विधानसभा चुनाव में किस्मत आजमा चुके हैं।
शब्द दूत ने इस वरिष्ठ कांग्रेस नेता से एक संक्षिप्त वार्ता में कांग्रेस की हार के कारणों पर चर्चा की। मुकेश मेहरोत्रा कहते हैं कि अब यहाँ कांग्रेस वह पुरानी कांग्रेस नहीं रह गई। पहले की कांग्रेस में चुनाव के दौरान एक मजबूत रणनीति बनाई जाती थी। अनुभवी और वरिष्ठ कार्यकर्ताओ को संगठन तरजीह देता था। लेकिन अब युवा पीढ़ी आ गई है। जनरेशन गैप पार्टी पर हावी हो गया है। हालांकि वह युवाओं को आगे आने के पक्ष में तो हैं। लेकिन संगठन की रणनीति से काफी आहत हैं।
मुकेश मेहरोत्रा कहते हैं कि जीत के करीब पहुंच कर हार मिलना वास्तव में सांगठनिक कमी है। दूसरी तरफ वह कहते हैं कि हार के कारण और भी हैं। धर्म और जाति के नाम पर लोगों को अपने पक्ष में करने की भाजपा की नीति के चलते लोगों का रूझान उस ओर मुड़ गया है। जबकि कांग्रेस कभी भी जाति और धर्म आधारित राजनीति नहीं करती।
2022 के चुनाव में अपनी दावेदारी की बाबत मुकेश मेहरोत्रा कहते हैं कि वह लंबे समय से पार्टी में हैं और पार्टी के लिए काम करते रहे हैं। दुर्भाग्य से उन्हें सफलता नहीं मिली। लेकिन अभी भी वह आने वाले चुनाव में प्रबल दावेदारी हाईकमान के समक्ष पेश करेंगे। टिकट किसे मिलेगा? यह फैसला हाईकमान को करना है। मुकेश मेहरोत्रा कहते हैं कि हाईकमान से टिकट मांगने का हर कांग्रेसी को अधिकार है। जिसे टिकट मिले उसे लड़ाना पार्टी कार्यकर्ताओं का कर्तव्य है।
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