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उत्तराखंड: धुमाकोट का नाम जसवंत गढ़ रखा जाय

@शब्द दूत ब्यूरो (17 जनवरी, 2022)

जसवंत गढ़ जिला संघर्ष समिति द्वारा अदालीखाल में 73वें थल सेना दिवस पर आयोजित समारोह राज्य सरकार द्वारा घोषित कोरोना गाइडलाइन्स के चलते नहीं हो सका। धुमाकोट में संघर्ष समिति की कार्यकारिणी की बैठक संघर्ष समिति के अध्यक्ष कर्नल राजदर्शन सिंह रावत की अध्यक्षता में हुई जिसमें संघर्ष समिति की शाखा पूर्व शिक्षक मित्र संगठन के अध्यक्ष शिक्षाविद गबर सिंह बिष्ट ने विकास खण्ड स्तर व ग्रामसभा स्तर पर समिति के विस्तार पर अपना प्रस्ताव रखा जो सर्वसम्मति से पारित हो गया।

दीपक बिष्ट को जसवंत गढ़ जिला संघर्ष समिति विकास खण्ड नैनीडांडा के अध्यक्ष पद पर मनोनीत किया गया। उन्हें नैनींडांडा विकास खण्ड में संघर्ष समिति के गठन के लिए अधिकृत किया गया है।

संघर्ष समिति के संयोजक आरपी ध्यानी ने कहा कि उत्तराखंड सैन्य बाहुल क्षेत्र है और देश की रक्षा में इस छोटे से राज्य से दो बड़े सैन्य शक्ति संगठन गढवाल राइफल व कुमाऊं रेजिमेंट देश की हिफाजत में तैनात हैं। इसी पहाड़ी़ क्षेत्र से देश की थल सेना के दो सैन्य प्रमुख रहे जर्नल बिपिन चन्द्र जोशी और जर्नल बिपिन रावत जो देश के प्रथम रक्षा अध्यक्ष भी रहे।

ध्यानी ने कहा कि हमें गर्व है अपनी सैन्य परम्परा पर और हमें अपने महान प्रतीकों को नहीं भूलना है। यह क्षेत्र सैन्य साहस के प्रतीक महावीर चक्र विजेता अमर शहीद जसवंत सिंह रावत का जन्म क्षेत्र है जो हर दृष्टि से पिछड़ा हुआ है जिसके विकास के लिए हम जसवंत गढ़ जिला गठन की सरकार से मांग कर रहे हैं।

संघर्ष समिति के सचिव उपदेश बिष्ट ने कहा जसवंत गढ़ जिला संघर्ष समिति शीघ्र ही पूरे क्षेत्र में व्यापक जनजागरण अभियान शुरू करेगी। इस बैठक में समिति के प्रमुख सदस्य पूर्व सैनिक योगेश्वर प्रसाद ध्यानी, भगत सिंह रावत व बहुत से युवा सदस्य बैठक में उपस्थित थे।

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