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राजकुमार को भाजपा ज्वाइन करा फंस गया पेंच, मालचंद ने पुरोला से चुनाव लड़ने का किया ऐलान

@शब्द दूत ब्यूरो (14 सितंबर, 2021)

उत्तराखंड में जहां एक ओर भारतीय जनता पार्टी आगामी विधानसभा चुनाव में ज्यादा से ज्यादा सीटें लाने के लक्ष्य को पाना चाहती है, वहीं कांग्रेस विधायक राजकुमार और निर्दलीय विधायक प्रीतम सिंह को पार्टी ज्वाइन करा भाजपा अपने ही बुने जाल में फंसने जा रही है। हालांकि ऐसा करके वह कांग्रेस को कमजोर करने का काम कर रही है, लेकिन टिकट बंटवारे के समय पार्टी के भीतर मचने वाले घमासान की आहट से कार्यकर्ता भी सकते में हैं।

राज्य की पुरोला विधानसभा से दो बार भाजपा के टिकट से विधायक रह चुके पूर्व विधायक मालचंद ने कहा है कि वो 2022 का चुनाव जरूर लड़ेंगे। ऐसे में मालचंद का ये फैसला कहीं न कहीं भाजपा की चुनाव समिति के लिए एक बड़ा सिरदर्द बन सकता है।

बीजेपी के पूर्व विधायक मालचंद ने साफ किया है कि वह हमेशा भाजपा के सिपाही के रूप में कार्य करते रहे हैं और करते रहेंगे। ऐसे में सियासी कयासबाजी लगाई जा रही है कि अगर बीजेपी साल 2022 के चुनाव में मालचंद का टिकट काटती है और हाल ही में बीजेपी में शामिल हुए राजकुमार को टिकट देती है, तो बीजेपी के लिए मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं।

पुरोला विधानसभा के कांग्रेस विधायक राजकुमार की घर वापसी बाद भाजपा के दो बार के पूर्व विधायक मालचंद ने अपनी चुप्पी तोड़ी है। पूर्व विधायक मालचंद ने कहा है कि 2002 से भाजपा के सिपाही हैं और उन्होंने एक सच्चे सिपाही के रूप में हमेशा सेवा की है। पार्टी ने उनपर विश्वास भी जताया है। इसलिए उन्हें पूरी उम्मीद है कि उन्हें पार्टी टिकट देगी. लेकिन इशारों-इशारों में मालचंद ने पार्टी को यह संकेत भी दिए हैं कि अगर उनका टिकट कटता है, तो वह निर्दलीय चुनाव लड़ सकते हैं।

मालचंद के बयान के तो यही लगता है कि अगर उनकी भाजपा में अनदेखी होती है। तो अन्य रास्ते भी अपनाए जा सकते हैं। हालांकि, कांग्रेस में शामिल होने के सवाल को उन्होंने स्थिति साफ करते हुए कहा कि वह हमेशा भाजपा के सिपाही ही रहेंगे। साथ ही राजकुमार का भाजपा में शामिल होने पर उन्होने स्वागत किया और कहा कि भाजपा का कुनबा बढ़ा है।

मालचंद भाजपा से 2002 और 2012 में विधायक रह चुके हैं। माना जा रहा है कि भाजपा आलाकमान पुरोला विधानसभा से आगामी चुनाव में मालचंद की जीत के आंकड़ों की पूरी पड़ताल करने के बाद ही कोई कदम उठाएगी। क्योंकि मालचंद ने जो दो चुनाव निर्दलीय रहते और भाजपा टिकट पर हारे हैं, जिनका अंतर मात्र 500 वोटों का ही है। ऐसे में अगर मालचंद का पार्टी से टिकट कटता है, तो बीजेपी के लिए मुश्किल भरा हो सकता है। क्योंकि मालचंद का अपना वोटबैंक है वो निर्दलीय भी किसी भी कैंडिटेट पर भारी पड़ सकते हैं।

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