मुख्यमंत्री के इलाज के बहाने कांग्रेस नेता किशोर उपाध्याय का राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था पर निशाना

@शब्द दूत ब्यूरो

देहरादून। कोविड पीड़ित मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के दिल्ली इलाज के जाने के बहाने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता किशोर उपाध्याय ने उत्तराखंड की बीमार स्वास्थ्य सेवाओं पर सरकार को आड़े हाथों लिया है।

इधर, सोशल मीडिया पर भी मुख्यमंत्री के दिल्ली इलाज के लिए जाने के मामले में बहुत सी प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। अधिकतर लोगों ने ये चिंता जताई है कि जब इलाज के लिए प्रदेश का मुखिया ही दिल्ली पर आश्रित है तो दूरस्थ इलाकों के गंभीर बीमारी से जूझ रहे ग्रामीणों का क्या होगा।

प्रसंगवश, अभी कुछ दिनों पूर्व ही दून से प्रकाशित हिंदी दैनिक ने ‘आयुष्मान भारत’ योजना के क्रियान्वयन के मामले में उत्तराखंड को देश में सर्वोच्च स्थान पर बताया था। हालांकि प्रदेश में एम्स जैसा अस्पताल भी है। लेकिन उसकी हालत भी किसी से छिपी हुई नहीं है।

मुख्यमंत्री को लिखे अपने पत्र में किशोर उपाध्याय ने लिखा है, “आपके अस्वस्थ होने का समाचार मीडिया के विभिन्न माध्यमों से मिला। जानकारी मिली कि आप, आपकी सह-धर्मणी और सुपुत्री भी कोविड-19 से संक्रमित हो गये हैं। यह हम सबके लिये चिन्ता का विषय है…!”

“मुख्यमंत्री जी, यद्यपि यह पत्र लिखते हुये मुझे संकोच हो रहा है। लेकिन क्योंकि पूरी प्रदेश की जनता का सवाल है, इसलिए मैं यह धृष्टता कर रहा हूं। मैं राज्य आन्दोलन का बुनियादी गिलहरी जैसा सिपाही रहा हूं। अगर मैं दो बार आन्दोलन के मूर्धन्य नेतृत्व को तत्कालीन गृहमन्त्री राजेश पायलेट से न मिलवाता तो सम्भवत: राज्य आन्दोलन होता या न होता..? इसलिये जब राज्य में राज्य आन्दोलन की भावना की हत्या होती है तो मैं स्वयं को अपराधी मानता हूं।”

किशोर उपाध्याय आगे लिखते हैं, “इस प्रदेश का इससे बड़ा क्या दुर्भाग्य होगा कि उसके सबसे बड़े ओहदेदार को अपने इलाज के लिये दिल्ली जाना पड़े। इससे पहले तो कई महानुभावों को दिल्ली और विदेश जाना पड़ा। संभवत: स्वास्थ्य विभाग आज के दिन भ्रष्टाचार आदि के मामलों में जनता के सामने क्या छवि प्रस्तुत कर रहा है…? उसका आप स्वस्थ होने पर आंकलन करेंगे, मेरी गुज़ारिश है।”

किशोर उपाध्याय ने एम्स ऋषिकेश पर भी सवाल खड़े किए हैं। उन्होनें लिखा, एम्स ऋषिकेश नियुक्तियों में भ्रष्टाचार के सारे रिकार्ड सम्भवतः तोड़ चुका है। वहां की व्यवस्था की निष्पक्ष एजेन्सी से जांच जरूरी है, जिससे उत्तराखंडियों के घर बर्बाद होने से बच सकें।

किशोर उपाध्याय ने आगे लिखा है, “21 वर्ष के वयस्क राज्य की स्थिति पर क्या कहा जाए..? शब्द नहीं मिल पा रहे हैं। आप प्रदेश के मुखिया हैं, इसलिये आपको दिल्ली एम्स में एडमीशन मिल गया। टिहरी का मरणासन्न मरीज आज की भयंकर ठण्ड में एक हफ़्ते फुटपाथ पर रहा, कई बड़े आदमियों से पुरज़ोर सिफ़ारिश के बाद भी उसको इमरजेंसी में बेड नहीं मिला।
टिहरी का जिक्र इसलिये भी कर रहा हूं क्योंकि पर्वतीय क्षेत्र की स्वास्थ्य सेवाओं की दुर्दशा से आप वाकिफ हैं।”

किशोर उपाध्याय ने अंत में लिखा है, “मैंने कुछ संवेदनशील पत्रकार मित्रों से बात की तो वे अपनी नौकरी जाने के भय से चिट्ठी को खबर बनाने में संकोच कर रहे हैं। वैसे भी कोविड-19 के काल में नौकरियों का अकाल है।

किशोर उपाध्याय के पूरे पत्र को पढ़ने के लिए इस लिंक पर जायें। https://www.facebook.com/726958997338727/posts/3868978869803375/

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