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लता मंगेशकर के लिए शाहरुख़ की दुआ की फूंक को थूक कहने पर छिड़ी बहस

लता मंगेशकर के अंतिम संस्कार के मौक़े पर उन्हें श्रद्धांजलि देने पहुंचे अभिनेता शाहरुख़ ख़ान ने जिस तरह से वहां दुआ की, इसे लेकर सोशल मीडिया पर बीजेपी के एक पदाधिकारी ने सवाल उठाया जिसकी काफ़ी आलोचना हो रही है।

@नई दिल्ली शब्द दूत ब्यूरो (07 फरवरी, 2022)

मुंबई के शिवाजी पार्क में लता मंगेशकर की अंत्येष्टि से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई शख़्सियतों ने पार्थिव शरीर के पास जाकर प्रार्थना की थी। शाहरुख़ वहां अपनी सेक्रेटरी पूजा ददलानी के साथ पहुंचे थे। एक ओर जहां शाहरुख़ के हाथ दुआ के लिए उठे हुए थे, वहीं पूजा ददलानी हाथ जोड़कर लता मंगेशकर को श्रद्धांजलि दे रही थीं।

शाहरुख़ ख़ान ने दुआ के अंत में नीचे झुककर मास्क हटाकर पार्थिव शरीर की ओर फूंका। इसी को लेकर की गई एक टिप्पणी ने ट्विटर पर बहस छेड़ दी। बीजेपी हरियाणा के आईटी सेल के प्रभारी अरुण यादव के ट्वीट ने इस विवाद को और हवा दी। उन्होंने श्रद्धांजलि देते शाहरुख़ ख़ान का वीडियो शेयर करते हुए लिख दिया- “क्या इसने थूका है?”

उनकी फूंक को थूक का नाम देकर लोग शाहरुख़ को ट्रोल करने लगे। हालाँकि एक दूसरा तबका उनकी और पूजा ददलानी की तस्वीर को भारत की असली तस्वीर कहकर तारीफ़ भी कर रहा है। इस विवाद में कई जाने-माने चेहरे भी कूद पड़े और शाहरुख़ की आलोचना को आड़े हाथों लिया।

शिवसेना की राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने ट्वीट किया- “कुछ लोग ना दुआ के क़ाबिल हैं, ना दया के उनको सिर्फ़ दवा की ज़रूरत है, मन के ज़हर को ख़त्म करने के लिए।” कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत्र ने भी शाहरुख़ के पक्ष में ट्वीट करते हुए उन पर सवाल उठाने वाले लोगों को घेरा है। सुप्रिया ने लिखा है- “आप ना केवल बंद दिमाग़ के शख़्स बल्कि बहुत दुष्ट व्यक्ति हैं जो एक दिवंगत आत्मा के लिए दुआ को भी नफ़रत फैलाने के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं। सब लोग सोचें, क्या हम दुष्टता को जीतने दे सकते हैं।”

नेताजी सुभाष चंद्र बोस के भाई शरत चंद्र बोस के पोते चंद्र कुमार बोस ने शाहरुख़ ख़ान के दुआ मांगने पर टिप्पणी की है। साल 2016 में पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की ओर से ममता बनर्जी के ख़िलाफ़ चुनाव लड़ चुके चंद्र कुमार बोस ने लिखा है – “लता मंगेशकर की अंत्येष्टि में दुआ मांगते शाहरुख़ ख़ान। यह भारत की असल संस्कृति और विरासत है। कुछ धार्मिक मदांध इसे हज़म नहीं कर सकते।”

वहीं जाने-माने समाचार पोर्टल वायर के संस्थापक वरिष्ठ पत्रकार सिद्धार्थ वरदराजन ने लिखा- “ये घिनौना ट्वीट बीजेपी के एक अधिकारी का है। इसमें अब कोई शक़ नहीं है कि समाज में कौन-कौन से लोग गंदगी और ज़हर फैला रहे हैं। अगर अरुण यादव दुआ से अनभिज्ञ हैं, तो दावा करने से पहले किसी से पूछ सकते थे।”

वरिष्ठ पत्रकार ओम थानवी ने कहा कि ट्विटर को ऐसे पोस्ट पर कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने लिखा है- “हैरानी है कि ट्विटर वाले जानते-बूझते छिड़े ऐसे ज़हरीले प्रचार अभियानों के सामने आंखें क्यों मूंद लेते हैं? क्या इसलिए कि ऐसे थूक-चाट के ट्वीट चर्चित होते हैं, विवाद को हवा देते हैं? यह तो चैनल चलाने के लिए गाली-गलौच वालों को जमा करने जैसा हो गया।”

दरअसल, मुसलमानों में यह एक आम रिवाज है। किसी की मौत पर या किसी और मौक़े पर भी फूंक कर दुआ पढ़ी जाती है। यह दुआ मुसलमानों के पवित्र धार्मिक ग्रंथ क़ुरान शरीफ़ की आयतें होती हैं। किसी की मौत पर पढ़ी जाने वाली दुआ में दिवंगत की आत्मा की शांति के लिए दुआ मांगी जाती है। इसके अलावा किसी की लम्बी आयु, जीवन में सफलता या अन्य बातों के लिए के लिए भी दुआ पढ़ी जाती है। दुआ पढ़ने के बाद पढ़ने वाला जिस किसी के लिए दुआ करता है अगर वो पास में होता है तो उसको सामने जाकर फूंकता है।

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