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लता मंगेशकर :बतौर राज्यसभा सांसद नहीं लिया कभी वेतन, बंगला भी ठुकराया

लता मंगेशकर ने 1999 से 2005 तक राज्यसभा सांसद के तौर पर देश की सेवा की थी। यही नहीं उन्होंने इस दौरान सांसद के तौर पर एक रुपये का भी वेतन या भत्ता नहीं लिया था। 

@नई दिल्ली शब्द दूत ब्यूरो (07 फरवरी, 2022)

भारत रत्न लता मंगेशकर के निधन से संगीत की दुनिया का एक अध्याय समाप्त हो गया है। भारत ही नहीं बल्कि पूरे उपमहाद्वीप और दुनिया भर में लोग उन्हें अपने-अपने तरीके से याद कर रहे हैं। लता मंगेशकर की गायकी के साथ ही उनके संसदीय सफर को भी लोग याद कर रहे हैं। उन्होंने 1999 से 2005 तक राज्यसभा सांसद के तौर पर देश की सेवा की थी। यही नहीं उन्होंने इस दौरान सांसद के तौर पर एक रुपये का भी वेतन या भत्ता नहीं लिया था। इसके अलावा दिल्ली में सांसद के तौर पर मिलने वाले आलीशान बंगले को भी ठुकरा दिया था।

मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में अंतिम सांस लेने वाली लता मंगेशकर को उनकी बेमिसाल आवाज, सादगी और व्यवहार कुशल व्यक्तित्व के तौर पर याद किया जाएगा। लता मंगेशकर साल 1999 से 2005 तक सदन का हिस्सा रही थीं। उन्हें 22 नवंबर, 1999 को राज्यसभा का मनोनीत संसद सदस्य घोषित किया गया था। अपने छह वर्ष के कार्यकाल में उन्होंने बतौर वेतन के भेजे गए चेक्स को कभी स्वीकार नही किया और हमेशा वापस भेज दिया। एक सामाजिक कार्यकर्ता द्वारा दायर की गई आरटीआई के बाद यह खुलासा हुआ है।

आरटीआई के बाद यह पता चला था कि लता मंगेशकर के वेतन से संबंधित मामले में वेतन-लेखा कार्यालय से लता को भेजे गए सभी चेक वापस आ गए। इसके अलावा लता मंगेशकर ने कभी भी सांसद पेंशन के लिए भी आवेदन नहीं किया था। यहां तक कि उन्होंने नई दिल्ली में सांसदों को दिए जाने वाले घर को भी ठुकरा दिया। लता मंगेशकर के अलावा क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर ने भी सांसद रहते हुए कभी न तो वेतन लिया और न ही उन्होंने नई दिल्ली में सांसदों को दिया जाने वाला घर स्वीकार किया। सचिन ने अपना पूरा सांसद वेतन 90 लाख रुपये प्रधानमंत्री राहत कोष में दान कर दिया था।

मध्यप्रदेश के छोटे से शहर इंदौर में जन्मी लता मंगेशकर ने अपनी जादुई आवाज के दम पर देश ही नही विदेश में भी परचम लहराया। प्रतिष्ठित रॉयल अल्बर्ट हॉल, लंदन में परफॉर्म करने वाली पहली भारतीय होने का सम्मान प्राप्त है। 2007 में फ्रांस की सरकार ने उन्हें ‘लीजन ऑफ ऑनर के अधिकारी’ से सम्मानित किया, जो देश का सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार है। लता मंगेशकर की उपलब्धियों को गिनना नमुमकिन है

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