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हाल-ए-चुनाव: जब खुद अपनी ही सीट पर फंसे हों तो दूसरों के लिए कैसे प्रचार करें नेता

विधानसभा चुनाव 2022 में कांग्रेस के जिन बड़े नेताओं पर चुनाव के दौरान पार्टी के प्रत्याशियों के पक्ष में माहौल बनाने की जिम्मेदारी थी, वो खुद अपने-अपने क्षेत्र में उलझकर रह गए हैं। प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल श्रीनगर सीट से नहीं निकल पा रहे हैं। बाकी चारों कार्यकारी अध्यक्षों के पास भी अपनी विधानसभा क्षेत्र से बाहर निकलने का समय नहीं है।

@शब्द दूत ब्यूरो (01 फरवरी, 2022)

तकरीबन एक महीना पहले तक भाजपा-कांग्रेस दोनों दलों ने विभिन्न विधानसभाओं में धुंआधार चुनावी यात्राएं आयोजित जरूर की, लेकिन नामांकन करते ही अधिकतर सभी छोटे नेताओं के साथ-साथ बड़े नेता भी अपने चुनाव क्षेत्रों तक ही सिमटकर रह गए हैं।

प्रत्याशी चयन प्रक्रिया से पहले तक हरीश रावत, गोदियाल और नेता प्रतिपक्ष प्रीतम सिंह ने ताबड़तोड़ रैली-जनसभाओं के जरिए चुनाव प्रचार अभियान को चरम पर पहुंचा दिया था। पर, मतदान का वक्त ज्यों ज्यों करीब आ रहा है, सभी शीर्ष नेता अपनी-अपनी सीट पर सिमट गए हैं।

कांग्रेस की चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष हरीश रावत भी ज्यादा वक्त लालकुआं सीट पर ही गुजार रहे हैं। रामनगर सीट पर विवाद होने पर रावत को लालकुआं शिफ्ट होना पड़ा तो अब उनका वक्त भी वहीं गुजर रहा है। हालांकि रावत सोशल मीडिया के जरिए लगातार सक्रिय हैं।

नेता प्रतिपक्ष प्रीतम सिंह भी पिछले काफी समय से चकराता में अपना किला मजबूत कर रहे हैं। दरअसल, प्रीतम सिंह जैसे हैवीवेट नेता के लिए अपने गढ़ को अजेय रखने की भारी चुनौती है। लिहाजा वे जी-जान से अपने क्षेत्र में चुनाव प्रचार में जुटे हैं। हालांकि बीच में कुछ समय उन्होंने विकासनगर, सहसपुर और कैंट को भी दिया है।

कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल श्रीनगर के रण में मशरूफ हैं। दूसरी तरफ कार्यकारी अध्यक्ष भुवन कापड़ी खटीमा, रणजीत रावत सल्ट, तिलकराज बेहड़ किच्छा और प्रो. जीतराम थराली में पसीना बहा रहे हैं। दरअसल, प्रदेश संगठन के शीर्ष नेताओं से अपेक्षा होती है कि वो अपने साथ-साथ दूसरे उम्मीदवारों की मजबूती के लिए काम करें। पर, वर्तमान हालात में सभी नेता अपनी अपनी सीट पर ही उलझे हैं। पार्टी को इस स्थिति से उबरने के लिए ठोस रणनीति पर काम करना होगा।

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