कोरोना के बाद अब ‘मारबर्ग वायरस’ ने बढ़ाई चिंता, वायरस से 88 प्रतिशत है मृत्युदर

@नई दिल्ली शब्द दूत ब्यूरो (17 अगस्त, 2021)

कोरोना का संकट अभी जारी है, इसी बीच एक नए वायरस ने भी दस्तक दे दी है, जो कोरोना से ज्यादा खतरनाक माना जा रहा है। इस वायरस का नाम मारबर्ग वायरस है। हाल ही में पश्चिमी अफ्रीका के देश गिनी में इस वायरस के संक्रमण का पहला मामला सामने आया है। जिसने दुनिया के सभी देशों के सामने खतरे की घंटी बजा दी है।

शोधकर्ताओं के अनुसार मारबर्ग वायरस इबोला से ज्यादा खतरनाक और जानलेवा है। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन ने मारबर्ग वायरस के मामले में कहा है कि यह चमगादड़ों में पाया जाता है। कोरोना को लेकर भी ऐसा ही दावा किया गया था। उसके बाद कोरोना ने पूरे विश्व में जो कहर मचाया ये किसी से छिपा नहीं है।

मारबर्ग वायरस को इबोला से ज्यादा खतरनाक और जानलेवा इसलिए बताया जा रहा है, क्योंकि इस वायरस से पीड़ितों की मृत्यु दर 88% है। विश्व स्वास्थ्य संगठन से मारबर्ग के बारे में यह जानकारी मिली है। वहीं मारबर्ग वायरस की एक और बात जो बहुत ज्यादा डराने वाली है कि ये बहुत तेजी से फैलता है।

डब्ल्यूएचओ के रीजनल डायरेक्टर डॉक्टर मात्शिदिसो मोएती ने कहा है कि मारबर्ग वायरस में तेजी से फैलने की क्षमता होती है, ऐसे में अगर इस वायरस को जल्द नहीं रोका गया तो विश्व के सामने एक नई समस्या खड़ी हो जाएगी।

मारबर्ग वायरस से जब कोई एक बार इन्फेक्ट हो जाता है तो फिर यह कोरोना वायरस की तरह तेजी से फैलने लगता है। सबसे ज्यादा हैरान करने वाली बात है कि मारबर्ग वायरस सतह, तरल पदार्थ और इन्फेक्टेड लोगों के खून से भी फैल सकता है।

मारबर्ग वायरस के संक्रमित मरीज के शरीर में दो से लेकर इक्कीस दिनों के बीच नजर आने लगते है। इस वायरस से पीड़ित व्यक्ति का स्वास्थ्य तेजी से खराब होने लगता है। उसे सिरदर्द, तेज बुखार और कमजोरी का अहसास होने लगता है।

   

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