कांग्रेस ने कोविड वैक्सीन की कीमत पर खड़े किए सवाल, सरकार से पूछा- कितने लोगों को मुफ्त में लगेगा टीका

@शब्द दूत ब्यूरो

नई दिल्ली। कोरोना वायरस महामारी पर अंतिम प्रहार के लिए देश में टीकाकरण कार्यक्रम शुरू हो चुका है। साथ टीकाकरण को लेकर राजनीति भी शुरू होती हुई नजर आ रही है। कांग्रेस ने मोदी सरकार को घेरते हुए पूछा है कि देश में कितने लोगों को, कहां से मुफ्त वैक्सीन मिलेगी। साथ ही मीडिया रिपोर्ट्स का हवाला देते हुए कोरोना वैक्सीन की कीमत पर भी सवाल उठाया गया है।

कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि आजादी के बाद कांग्रेस सरकार ने वैज्ञानिक शोध को बढ़ावा दिया और कई देशव्यापी टीकाकरण अभियान शुरू किए ताकि गंभीर बीमारियों से लड़ा जा सके। सुरजेवाला ने कहा, “मैं टीकाकरण और स्वदेशी वैक्सीन उत्पादन नीति की कुछ उपलब्धियां बताऊंगा। पहला, हमने राष्ट्रीय ट्यूबरकुलोसिस नियंत्रण कार्यक्रम (1962), राष्ट्रीय चेचक उन्मूलन कार्यक्रम (1962) समेत कई कार्यक्रम शुरू किए। 2011 में देश को ‘पोलियो-मुक्त’ बनाया। आज से पहले वैक्सीन का विकास और टीकाकरण कभी  ‘ईवेंट’ या ‘प्रचार प्रसार’ का स्टंट नहीं बना।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं भाजपा सरकार को इन महत्वपूर्ण प्रश्नों के जवाब देने होंगे कि निशुल्क कोरोना वैक्सीन ‘किसे’, ‘कैसे’ और ‘कहां’ मिलेगी? भारत के ड्रग कंट्रोलर के अनुसार, सरकार ने वैक्सीन की 16.5 मिलियन (165 लाख) खुराकें (55 लाख कोवैक्सीन एवं 1.1 करोड़ कोविशील्ड) मंगाई हैं। हर व्यक्ति को 2 खुराक दिए जाने पर यह वैक्सीन 82.50 लाख डॉक्टर, स्वास्थ्यकर्मियों को ही दी जा सकेगी, जबकि मोदी सरकार दावा कर रही है कि पहले राउंड में वैक्सीन 3 करोड़ लोगों को दी जाएगी। प्रधानमंत्री एवं मोदी सरकार इस बात का जवाब देने से कतरा रहे हैं कि भारत की बाकी जनसंख्या, यानि 135 करोड़ नागरिकों को कोरोना वैक्सीन कैसे मिलेगी और क्या यह वैक्सीन उनके लिए भी निशुल्क होगी?  क्या दलित, आदिवासी, पिछड़ा वर्ग, बीपीएल, एपीएल, गरीब एवं सुविधाओं से वंचित लोगों को वैक्सीन नि:शुल्क मिलेगी या नहीं? 

‘कोविशील्ड’ एस्ट्राजेनेका द्वारा विकसित वैक्सीन’ है, जिसे सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया बना रही है। यह वैक्सीन भारत सरकार को 200 रुपये प्रति खुराक की दर से दी जा रही है। एस्ट्राजेनेका ने वैक्सीन ‘बिना कोई मुनाफा कमाए’देने का वादा किया है। एक मीडिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए सुरजेवाला ने कहा कि बेल्जियम के मंत्री ऐवा डे ब्लीकर के अनुसार, उनके लिए एस्ट्राजेनेका वैक्सीन की कीमत 1.78 यूरो (2.18 अमेरिकी डॉलर) यानि 158 रुपये है। सरकार वैक्सीन के लिए ज्यादा पैसा क्यों दे रही है।

कोवैक्सीन का उत्पादन ‘भारत बायोटेक’ द्वारा किया जा रहा है। कोवैक्सीन की एक खुराक 295 रुपये में दी जा रही है। भारत बायोटेक ने आईसीएमआर के सहयोग से कोवैक्सीन बनाई है। ‘कोवैक्सीन’ को अनुमति, पहले चरण में 375 प्रतिभागियों एवं दूसरे चरण में 380 प्रतिभागियों यानि कुल 755 प्रतिभागियों पर परीक्षण किए जाने के बाद दी गई। तीसरे चरण का परीक्षण अभी चल रहा है। सवाल यह है कि मोदी सरकार भारत बायोटेक की वैक्सीन के लिए 95 रुपये ज्यादा क्यों दे रही है? क्या इसका मूल्य कोविशील्ड से कम नहीं होना चाहिए?

11 जनवरी 2021 को सीरम इंस्टीट्यूट के सीईओ अदार पूनावाला ने साफ तौर से कहा कि वो एस्ट्राजेनेका की ‘कोविशील्ड वैक्सीन’ खुले बाजार में 1000 रुपये प्रति खुराक में बेचेंगे यानि व्यक्ति के लिए जरूरी दो खुराकों की कीमत 2000 रु. होगी।

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