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संपादक की बात – हमारे शहर की पुलिस बड़ी नाकारा है, साहब

 
जी हाँ, 
हम लोग वही पर थे 
 जब वह दो आदमी उसे मार रहे थे 
लेकिन पुलिस का कोई आदमी नहीं था 
अच्छा 
आप कितने लोग थे वहां पर 
यही कोई दस पंद्रह लोग थे हम साहब 
अरे , वह दोनों उसे बुरी तरह मार रहे थे 
हमने देखा साहब 
अच्छा आप क्या कर रहे थे उस वक़्त 
वीडियो बना रहे थे 
और  पुलिस का इंतज़ार 
पुलिस आयी क्या 
हाँ साहब , 
आयी लेकिन काफी देर बाद पहुंची 
 तब तक उसे बुरी तरह से पीट चुके थे .,
ओह , आप लोगो ने पूरा वाकया देखा 
जी हाँ , हमने पूरी घटना देखी 
जी हाँ देखते रहे 
क्योकि हमारा काम देखना है 
बचाती तो पुलिस ही ना 
अब क्या बताएं
हमारे शहर की पुलिस बड़ी नाकारा है , साहब
                                   –   विनोद भगत, संपादक
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