Breaking News

विशेष : तीन वर्ष के कार्यकाल में डटकर चुनौतियों का सामना कर उपलब्धियां हासिल की त्रिवेंद्र सिंह रावत ने मुख्यमंत्री के तौर पर

@लेखक मनीष वर्मा(पूर्व राज्यमन्त्री और फिल्म निर्माता होने के साथ-साथ वायस आफ नेशन के संपादक हैं)

देहरादून/नई दिल्ली। देश के प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी हो या गृह मंत्री अमित शाह और या हो “भाजपा” का केंद्रीय नेतृत्व या राष्ट्रीय अध्यक्ष जे पी नड्डा सभी जनता की नब्ज टटोलने में माहिर माने जाते है और यही कारण है कि आज भाजपा देश मे बहुमत में है और अब राज्यसभा में भी बहुमत हासिल करने जा रही है यानी जो भी बिल भाजपा लोकसभा में पारित करेगी वह आसानी से राज्यसभा में भी हो जाएगा ।

3 वर्ष पूर्व भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने भाजपा के एक ऐसे जुझारू ,सौम्य, संवेदनशील,संगठन को जोड़ने व जमीन स्तर पर काम करने वाले व्यक्ति को जनता की नब्ज टटोल कर उत्तराखंड की कमान दी और यहाँ का मुख्यमंत्री बनाया ।

हालांकि उत्तराखंड की राजनीति में कई उतार चढ़ाव शुरू से आते रहे और यहाँ विभिन्न पार्टी व उनके संगठनों ने सत्ता और संगठन को 2 भागो में बांटे रखा और एक दूसरे की टांग खिंचाई में लगे रहे व इसके कई उदाहरण भी यहाँ की जनता ने देखे व अनुभव किये ।

स्वo“नारायण दत्त तिवारी” का “हरीश रावत” ने जहाँ 5 साल उनकी नाक में दम करके रखा वही दूसरी ओर “खिलाड़ियों“ के खिलाड़ी नारायण दत्त तिवारी भी हरीश रावत को समय समय पर धूल चटाते रहे और 5 साल पूरे कर गए । इन 20 वर्षों में उत्तराखंड ने 8 मुख्यमंत्री देखे जिसमे 5 बार भाजपा के मुख्यमंत्री बने व 3 बार कांग्रेसी मुख्यमंत्री रहे । इन मुख्यमंत्रियों में “नित्यानंद स्वामी” 9 नवम्बर 2000 से 29 अक्टूबर 2001 (354 दिन ),“भगत सिंह कोशियारी” 30 अक्टूबर 2001 से 1 मार्च 2002 ( 122 दिन )“नारायण दत्त तिवारी” 2 मार्च 2002 से 7 मार्च 2007 (5 साल 5 दिन ),“भुवन चन्द्र खंडूरी” 7 मार्च 2007 से 26 जून 2009 ( 2 वर्ष 111 दिन ),“रमेश पोखरियाल” 27 जून 2009 से 10 सितम्बर 2011(2 साल 75 दिन ),“भुवन चन्द्र खण्डूरी” 11 सितम्बर 2011 से 13 मार्च 2012 ( 184 दिन ),“विजय बहुगुणा” 13 मार्च 2012 से 31 जनवरी 2014 (324 दिन ),“हरीश रावत” 1 फरवरी 2014 से 27 मार्च 2016 (2 साल 55 दिन )“पुनः हरीश रावत” 1 दिन , हरीश रावत 11 मई 2016 से 17 मार्च 2017 व ततपश्चात वर्तमान “मुख्यमंत्री” “त्रिवेंन्द्र सिंह रावत“ चले आ रहे है ।

दल-बदल भी उत्तराखंड में चर्चित रहा साथ ही खंडूरी – निशंक विवाद और सबसे बड़ा बहुगुणा -हरीश रावत विवाद इतना बढ़ा की कांग्रेस को छोड़ 11 विद्यायको व वरिष्ठ नेताओं सहित उनके कई समर्थकों ने भाजपा का दामन थाम लिया और इससे पहले उद्यान घोटाले में फँसाये जाने से नाराज़ बरिष्ठ कांग्रेसी व “सोनिया गांधी“ के नजदीकी सतपाल महाराज भाजपा में आ चुके थे ।

 18 मार्च 2017 में जब त्रिवेंन्द्र सिंह रावत उत्तराखंड के आठवें मुख्यमंत्री बने तो उनके सामने बहुत चुनौतियां थी जिनमे कांग्रेस से भाजपा में आकर विधायक जीत कर आये नेताओ को मंत्री बनाना ,गढ़वाल कुमाऊँ का परस्पर बैलेंस बनाना, संगठन को संभालना व सरकारी तंत्र को सही पटरी पर लाने के साथ साथ राज्य में आमदनी के स्तोत्र बढ़ाने व पलायन को रोकना जैसी बड़ी चुनौतियों का आमना -सामना था ।

त्रिवेंद्र सिंह रावत के अब तक के कार्यकाल कई चुनाव आये। जिसमें 5 लोकसभा जिताने की सबसे कठिन जिम्मेदारी दी गयी जिसमे उन्होंने अपने अथक प्रयास से पांचों सीटों को जिताकर भाजपा की झोली में डाल दिया तथा उसके बाद एक -एक कर थराली चुनाव ,पिथोरागढ़ चुनाव ,नगर निगम चुनाव ,जिला पंचायत आदि त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने भाजपा की झोली में डाले और आज प्रदेश में 5 सांसद,57 विधानसभा सदस्य, 8 मंत्री ,70 दर्जाप्राप्त,11 जिला पंचायत अध्यक्ष ,5 मेयर त्रिवेन्द्र सिंह रावत के दम पर भाजपा को मजबूत बनाने में जुटे है ।

त्रिवेंन्द्र रावत के नेतृत्व में प्रदेश में पहली बार अंतरराष्ट्रीय इन्वेस्टर सम्मिट हुआ।  इतना बड़ा व महत्वपूर्ण कार्यक्रम जिसमे कि उत्तराखंड इन्वेस्टर का डेस्टिनेशन बन गया और देश विदेश के इन्वेस्टर्स की पहली पसंद बन गया जिसमे 1.24 लाख करोड़ के एग्रीमेंट हस्ताक्षर हुए हो और 17000 करोड़ का निवेश आ चुका हो और 11000 से अधिक उद्यमों की स्थापना हुई हो और 80,000 लोगो को रोजगार मिल गया हो और 40,000 नये रोजगार के अवसर सृजित हो गए हो तथा निर्यात में 73 प्रतिशत बढ़ोतरी हो गयी हो और राज्य आने वाले कुछ ही समय मे आई टी व ऑटोमोबाइल का हब बन जायेगा 12 ऐसे सेक्टर राज्य सरकार ने चिन्हित किये है जिनमे व्यापार की असीम सम्भावनाये सृजित की गई है । क्या कभी किसी मुख्यमंत्री के कार्यकाल में हुआ ऐसा जिसमें की प्रधानमंत्री तक स्वयं आये हो ?

प्रदेश में केदार नाथ में मोदी के विज़न को धरातल पर उतारा गया और आज दुनिया उत्तराखंड को सलाम कर रही है । और मोदी पहले व उसके बाद जनरल वी के सिंह हाल ही में विकास कार्यो का दौरा भी कर गए है

आपदा और राहत पर त्वरित कार्यवाही व समय पर स्तिथि पर नियंत्रण करके अपने अधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित कर मुख्यमंत्री ने जबरदस्त संदेश दिया । यहाँ तक कि आल वैदर रोड के ग्रामीणों को धड़ाधड़ मुआवजा एकाउंट में आ रहा है वो लोग धड़ाधड़ जगह जगह जमीनें खरीद रहे है व अपना घर बसा रहे है । आपदा के चैक डीएम घर पहुँचवा रहे है ।

प्रत्येक घर मे बिजली आ रही है व लाने के प्रयास शुरू हो गए है,प्रत्येक परिवार में गैस ,पर्यटन की अपार संभावनाओं को देखते हुए 5000 हॉलिडे होम,शत प्रतिशत साक्षरता ,200 नए स्टार्टअप,राज्य के सभी नागरिकों को स्वास्थ्य बीमा,1 लाख युवाओं को कौशल विकास से जोडने की कार्यशाला ,सभी ग्राम पंचायतों में फाइबर ऑप्टिकल यानी इंटरनेट सुविधा जिससे कितनी नजदीकियां व कम्युनिकेशन बढेगा ,1 लाख परिवारों को आवसीय सुबिधा ,बिजली बचत के लिए सौर ऊर्जा सरकारी कार्यालयों में लगाना,वर्षा जल संग्रह्न,पेट्रोल डीजल बचत के लिए के लिए सभी सरकारी बसों को सीएनजी में परिवर्तित करना ,आज सबको जमीनों की खाता – खतौनी ऑनलाइन मिलती है । माँ गंगा में बिना ट्रीटमेंट के अपशिष्ट प्रवाहित नही होगा । राज्य के 13 जिलों में आई सी यू,ट्रामा सेंटर ,ब्लड बैंक की स्थापना की जा रही है । प्रदेश में कुपोषण रोकने हेतु योजना 2019 व 1600 बच्चों को जन प्रतिनिधि व अधिकारियों द्वारा गोंद लिया जाना बड़ी उपलब्धिया है ।

राष्ट्रीय फ़िल्म पुरुस्कारों में उत्तराखंड को मोस्ट फ्रेंडली राज्य का पुरुस्कार मिलना, देश की सबसे बढ़िया फ़िल्म नीति,220 फिल्मों की शूटिंग,फ़िल्म निर्माताओं का पसन्द डेस्टिनेशन बनना,सिंगल विंडो क्लेरेंस सिस्टम,शूटिंग शुल्क माफ करने के साथ ही उत्तराखंड में 50% शूटिंग करने पर टैक्स फ्री व 75% शूटिंग करने पर पोस्ट प्रोडक्शन पर अनुदान दिया जाने के साथ ही सरकारी आवास गृहो पर 50% छूट दी जा रही है ।

त्रिवेंद्र सिंह रावत ने प्रदेश में भृष्टाचार को समाप्त कर दिया है न तो एसपी और न डीएम पैसा देकर ट्रांसफर हो रहे है और न ही कही कोई दलाली प्रथा चल रही है ।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आंख,नाक,कान व उनकी परछाई कहे जाने वाले केन्द्रीय अधिकारी व मन्त्रीगण जिनमे आर्मी चीफ विपिन रावत जनरल वी के सिंह ,सुरक्षा सलाहकार अजित डोवल ,राजनाथ सिंह,स्मृति ईरानी,किरण रिजिजू ,प्रकाश जावड़ेकर ,जे पी नड्डा आदि उत्तराखंड आये व एक अच्छी छवि लेकर गए और मोदी जी तक पॉजिटिव संदेश गया ।साथ ही अगल बगल के राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने भी हाई कमान को त्रिवेंद्र जी का अच्छा फीडबैक दिया हे ।

 त्रिवेंद्र सरकार की 3 वर्षीय कार्यकाल में बड़ी उपलब्धियों पर एक नज़र : – प्रदेश में 2584 करोड़ का जमरानी प्रोजेक्ट केंद्र से पास हुआ। सिंचाई विभाग की समीक्षा बैठक में जानकारी दी गई। केदारनाथ में मंदाकिनी नदी पर सुरक्षा निर्माण कार्य पूरा हो गया है। जमरानी बांध परियोजना के लिए ₹47 करोड़ जारी किये जा चुके हैं। सितंबर2019 तक त्यूणी-प्लासू हाइड्रो प्रोजेक्ट से संबंधित सभी स्वीकृतियां प्राप्त कर ली जाएंगी। ऋषिकेश -कर्णप्रयाग रेलवे का कार्य प्रगति पर हुआ। भारतीय रेलवे ने उत्तर रेलवे के मुरादाबाद मंडल में वीरभद्र-न्यू ऋषिकेश रेल सेक्शन पर ऋषिकेश-कर्णप्रयाग के बीच 125 किलोमीटर लम्बी नई ब्रॉडगेज रेल लाइन बिछाने का फैसला लिया है। चारधाम के लिए आल वेदर रोड का कार्य तेजी से बढ़ा ।

अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे उत्तराखंड को केंद्र से बड़ी सौगात के रूप में मिली चारधाम बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री को जोड़ने वाली ऑल वेदर रोड परियोजना धीरे-धीरे मंजिल की ओर बढ़ रही है। धार्मिक, सामरिक और क्षेत्रीय लिहाज से अहम 11700 करोड़ की लागत वाली परियोजना में अब तक सड़कों का करीब 25 फीसद कार्य पूरा हो चुका है, जबकि भूमि हस्तांतरण से जुड़े लगभग 90 फीसदी कार्य हो चुके हैं। सूर्यधार झील का निर्माण लागत 50 करोड़ तेजी से हो रहा है । ₹50 करोड़ की लागत से निर्माणाधीन सूर्यधार झील का औचक निरीक्षण किया। इस प्रोजेक्ट की डेडलाइन 2020 है, तय समय पर सभी कार्य गुणवत्ता के साथ पूरा करने के निर्देश दिए। इस योजना से 29 गांवो को पेयजल तथा सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध होगा।पर्यटन को बढ़ावा मिलने से रोजगार के नए अवसर मिलेंगे। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने सूर्याधार झील को इस तरह से विकसित करने के निर्देश दिए हैं ताकि यह भविष्य में टूरिस्ट डेस्टिनेशन बन सके। उन्होंने क्षेत्र में किए जा रहे विकास कार्यों को तय सीमा के भीतर पूर्ण करने के निर्देश दिए। देहरादून एयरपोर्ट प्रोजेक्ट उड़ान के तहत कई नए डेस्टिनेशन से जुड़ा । नमामि गंगे में 14 एम एल डी कैपेसिटी माडल एस टी पी हुआ । प्रमुख प्रोजेक्ट की अगर बात करें तो गंगा से लगे शहरों में एसटीपी का निर्माण।गंगा में गिरने वाले गंदे नालों की टैपिंग।गंगा किनारे के पुराने घाटों का जीर्णोद्धार।स्नान घाट व श्मशान घाटों का निर्माण।गंगा व उसकी सहायक नदियोें के किनारे पौधरोपण।विभिन्न संगठनों व संस्थाओं की मदद से जनजागरुकता।1203 करोड़ के पानी के प्रोजेक्ट को इन प्रिंसिपल सहमति दी गयी ।सुमाड़ी एन आई टी को अपना कैम्पप तैयार किया जाना। 

उत्तराखंड में राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) सुमाड़ी श्रीनगर में ही स्थापित होगा। इसे लेकर पिछले काफी समय से बनी असमंजस की स्थिति पर दिल्ली में आयोजित मानव संसाधन विकास मंत्रालय की बैठक के बाद विराम लग गया। दिल्ली में आयोजित बैठक में सहमति बनी की एनआईटी का आगामी शिक्षा सत्र अस्थाई परिसर श्रीनगर में प्रारंभ किया जाएगा। वहीं एनआईटी जयपुर से छात्रों को सुमाड़ी लाने के लिए उच्च स्तरीय समिति बनाई जाएगी।

प्रदेश में पहली बार राष्ट्रीय खेलो का आयोजन होगा। उत्तराखंड बनने के 21 साल बाद साल 2021 में एक ऐसा मौका आएगा जब ये पहाड़ी प्रदेश देश को अपना दम दिखाते को पहली बार नेशनल गेम्स का आयोजन करेगा. देश में खेल के इस सबसे बड़े इवेंट को लेकर सरकार ने तैयारियां शुरु कर दी हैं। बुधवार को मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने खेल विभाग के अधिकारियों के साथ तैयारियों को लेकर समीक्षा बैठक की। सीएम ने साफ़ कहा कि राष्ट्रीय खेलों का आयोजन राज्य की प्रतिष्ठा से जुड़ा है इसलिए इस इवेंट में कोई कमी नहीं रहनी चाहिए। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि भले ही आयोजन नवंबर 2021 में होना है लेकिन सभी तैयारियां अक्टूबर 2020 तक पूरी कर ली जाएं। देहरादून व हल्द्वानी में एक एक खेल गांव बनाया जाएगा । देहरादून में 15 व हल्द्वानी में होगा 8 खेलो का आयोजन। देहरादून खेल गांव में 8000 खिलाड़ियों व अधिकारियों के रहने की हॉगी व्यव्यस्था । इलेक्ट्रिक वाहनों से प्रदूषण से मुक्ति। 

सिडकुल औद्योगिक क्षेत्र में भूमि की लागत में छूट। स्टाम्प शुल्क प्रभार से छूट। प्रदेश में पहली बार जल नीति को मंजूरी दी गयी। देहरादून –पंतनगर–“पिथौरागढ़“ सस्ती हवाई सेवा शुरू। नैनी सैनी से धारचूला-चिन्याली सौड़ हेली सेवा शुरू हुई । उत्तराखंड की 670 न्याय पंचायत में ग्रोथ सेंटर की योजना। उत्तराखंड के13 जिलों में 13 टूरिज्म डेस्टिनेसशन योजना के साथ होम स्टे योजना । उत्तराखंड में 2022 तक सभी गांवों।को सड़क से जोड़ने का लक्ष्य । मुख्यमंत्री मोनिटरिंग डैशबोर्ड ‘उत्कर्ष ‘ की स्थापना । देवबंद रुड़की रेलवे लाइन का वरदान ।महिला स्वयं सहायता समूह को 5 लाख तक का आसान ऋण ।महिलाओं की सहायता के लिए “सखी “वन स्टॉप सेंटर “प्रधानमंत्री मातृ वंदन योजना सभी जनपदों में लागू ।आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का वेतन 6000 से बढ़ा कर 7500 किया गया। 

त्रिवेंद्र सरकार का कहना है कि हमारा प्रयास है कि किसानों को अधिकतम मूल्य एवं बेहतर सुविधायें उपलब्ध हों। रबी खरीद सत्र 2020-21 के लिए गेहूं के समर्थन मूल्य में 65रुपए/कुंतल की वृद्धि कई गई है। किसान भाइयों से अब गेहूं ₹1925 प्रति क्विंटल की दर से खरीदा जाएगा। राज्य के 8.38 लाख किसानों को मिली किसान सम्मान निधि। जैविक खेती के लिये एक्ट लागू किया गया । स्मार्ट सिटी के लिए 1461 करोड़ स्वीकृति मिली ।टॉपर छात्रो को 50% वजीफा ।भव्यता व दिब्यता से  कुम्भ के आयोजन को प्रतिबद्धता। वर्चुअल क्लास से 500 राज्य विद्यालयों को कनेक्टिविटी । ऊर्जा के क्षेत्र में 283 उद्यमियों को 800 करोड़ के प्लांट आवंटित किए गए ।अटल आयुष्मान योजना राज्य के लिए वरदान बनी हुई है। 

यदि आचार संहिता व कुछ विशेष दिनों को छोड़े तो अब राज्य में सरकार का कार्यकाल मात्र 1 वर्ष 06 माह ही शेष बचा है तथा 3 वरिष्ठ व बुजुर्ग लोगो को मंत्री पद की शपथ भी लेनी बाकी है और 25 नवंबर 2020 में एक राज्यसभा का चुनाव भी होना है क्योंकि आज तक यहाँ की जनता को कभी न दिखने वाले कांग्रेस के राज बब्बर का कार्यकाल पूरा हो जाएगा और इसके बाद 2021 में भाजपा का राज्यसभा में भी बहुमत हो जाएगा जो नरेंद्र मोदी सरकार की एक और सवसे बड़ी उपलब्धि हॉगी और दोनो सदनों में भाजपा का बहुमत हो जाएगा

यदि फरवरी 2022 में उत्तराखंड में नई सरकार बननी है तो 3 माह तो रणनीति कार छोड़ कर गणना करते ही है और 2022 फरवरी से उल्टा जोड़े तो फरवरी 2021 का हुआ 1 साल और फरवरी 2021 से मार्च 2020 हुए 1 साल 11 माह यानी ये 3 महीने रणनीतिकारों के अनुसार आचार संहिता आदि के निकाल दे तो बचे 1 साल 11 माह और इस दौरान सभी विधायकों,मंत्रियो अपने-अपने विधान सभा क्षेत्र को भी देखना है । खासकर मुख्यमंत्री पर तो पूरे 70 विधान सभा क्षेत्रो की जिम्मेदारी भी है और किस प्रकार पुनः प्रदेश में भाजपा की सरकार बने इसके लिए भी जोड़-तोड़ करना है । कुछ लोग दायित्व के इंतेज़ार में है वो भी अब मुख्यमंत्री को दे देना चाहिए क्योंकि समय कम रह गया है ।

मुख्यमंत्री त्रिवेंन्द्र सिंह की असली परीक्षा की घड़ी तो अब शुरू हुई है। क्योंकि अब लोकतंत्र के बड़े पर्व का समय नजदीक आ रहा है जिसमे 70 विधानसभाओं में किस प्रकार फतह हासिल करनी है उस पर टीम बना कर मंथन शुरू करने के साथ और पत्ते फेंट कर बिसात बिछा देनी चाहिए ।

रोज रोज के बेवजह के आरोप प्रत्यारोप के बीच कई बार ऐसा मौका आया जब लगा कि अब मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत बदल दिए जाएंगे पर ऐसा कुछ भी नही था और विरोधियों को कुछ हाथ नहीं लगा। 

गैरसैण के उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी होने की घोषणा की। मुख्यमंत्रीने कहा कि ववह प्रदेश की मातृशक्ति को नमन करता हैं जिन्होंने उत्तराखंड आंदोलन में युवाओं के सहयोग से बढ़चढ़ कर भाग लिया और इस निर्णय को प्रदेश निर्माण आंदोलन में अपने प्राणों की आहुति देने वाले सभी शहीदों को समर्पित करता हूँ।

उत्तराखंड पर्वतीय राज्य है, पहाड़ में राजधानी यहां के लोगों का सपना रहा है, इसके लिए हम सभी ने संघर्ष भी किया है। इन्हीं जनभावनाओं का सम्मान करते हुए गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित किया है।

चल रहे विधानसभा सत्र में त्रिवेंन्द्र सिंह रावत ने ऐसा छक्का मारा की बड़े बड़े धुर विरोधी भी पस्त हो गए।  गैरसैण को ग्रीष्म कालीन राजधानी घोषित कर जहाँ त्रिवेंन्द्र सिंह रावत ने देश दुनिया मे रिवर्स पलायन को जन्म देकर उत्तराखंडियों का दिल जीत लिया। वही देहरादून के नागरिकों का भी राजधानी के चलते बोझ हल्का करने पर दिल जीत लिया और यह तो ऐसा मुद्दा है जिससे लगता है कि त्रिवेंन्द्र सिंह पुनः बहुमत से आ रहे है और अगले मुख्यमंत्री बनते नज़र आ रहे है ।

Website Design By Mytesta +91 8809666000

Check Also

क्‍या राहुल गांधी को ब्रिटेन यात्रा के लिए मंजूरी की जरूरत थी?

🔊 Listen to this @नई दिल्ली शब्द दूत ब्यूरो (25 मई, 2022) कांग्रेस के पूर्व …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *