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ब्रेकिंग : निर्भया रेप मर्डर के दोषियों को अभी फांसी देना पाप होगा, पटियाला हाउस कोर्ट ने कहा

फांसी कब होगी?

@शब्द दूत ब्यूरो

नई दिल्ली। निर्भया रेप मर्डर के दोषियों को अभी फांसी देना पाप होगा । पटियाला हाउस कोर्ट ने यह कहते हुए निर्भया के दोषियों का तीसरा डेथ वॉरंट जारी करने की तिहाड़ प्रशासन की याचिका खारिज कर दी है। 

कोर्ट ने साफ तौर पर कहा कि जब कानून के अनुसार दोषियों को जिंदा रहने की इजाजत  है, तो उन्हें फांसी देना पाप होगा। अदालत ने कहा कि डेथ वारंट केवल अटकलों और अनुमानों के आधार पर जारी नहीं किया जा सकता है। कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश का भी जिक्र करते हुए कहा कि  दोषियों को कानूनी विकल्प के लिए 11 फरवरी तक का वक्त दिया है।

बता दें कि तिहाड़ जेल प्रशासन ने निर्भया केस के चारों दोषियों के तीसरे डेथ वॉरंट के लिए पटियाला हाउस कोर्ट में अर्जी दायर की थी। इसमें मांग की गई थी कि सीआरपीसी की धारा 413 और 414 के तहत फांसी की तारीख तय की जाये। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश जस्टिस धर्मेंद्र राणा ने इस पर चारों दोषियों को जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए थे।

पटियाला हाउस कोर्ट के इस निर्देश पर पीड़िता की मां आशा देवी ने कहा- ”आज कोर्ट के पास ताकत और हमारे पास वक्त है। सब कुछ साफ है फिर भी डेथ वॉरंट जारी न होना हमारे साथ नाइंसाफी है। जब तक कोर्ट दोषियों को वक्त देता रहेगा और सरकार उन्हें सपोर्ट करती रहेगी, मैं इंतजार करूंगी।”

गौरतलब है कि जब निचली अदालत से दोषियों की फांसी टल गई तो  केंद्र सरकार और तिहाड़ जेल प्रशासन दिल्ली हाईकोर्ट पहुंचा था। वहीं दिल्ली हाईकोर्ट ने सुनवाई के बाद निचली अदालत के फांसी पर रोक के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी थी। साथ ही कहा- इसमें कोई शक नहीं कि दोषियों ने देरी की तरकीबों का इस्तेमाल कर प्रक्रिया को हताश किया। मई 2017 में जब सुप्रीम कोर्ट ने दोषियों की अपील खारिज कर दी, तब किसी ने भी डेथ वॉरंट जारी के लिए पहल नहीं की। चारों दुष्कर्मियों को अलग-अलग फांसी नहीं दी जा सकती है। अब दोषी सभी कानूनी विकल्प एक हफ्ते में (11फरवरी तक) इस्तेमाल करें और अधिकारी इन पर तुरंत एक्शन लें। इसके बाद केंद्र ने इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। इस पर अगली सुनवाई 11 फरवरी को होगी।

अब सिर्फ पवन गुप्ता के पास बचाव के लिए विकल्प हैं बाकी तीनों  अक्षय ठाकुर, विनय शर्मा और मुकेश शर्मा के दोनों विकल्प (क्यूरेटिव पिटीशन और दया याचिका) खत्म हो चुके हैं।  जो उसे 11 फरवरी तक इस्तेमाल करने होंगे।

कानूनी विकल्पों का सहारा लेकर दोषी अभी फांसी से बचते आये हैं। आपको याद होगा कि अदालत ने पिछले महीने 7 जनवरी को 22 जनवरी को सुबह 7 बजे तिहाड़ जेल में सभी चार दोषियों को फांसी देने के लिए ब्लैक वॉरंट जारी किया था। लेकिन एक दोषी की दया याचिका राष्ट्रपति के पास लंबित रहने की वजह से उन्हें फांसी नहीं दी जा सकी। एक बार फिर अदालत ने 17 जनवरी को दोषियों की फांसी की तारीख 1 फरवरी तय की। ठीक एक दिन पहले यानी 31 जनवरी को फिर से कोर्ट ने यह कहते हुए कि तीन दोषियों पवन, विनय और अक्षय की फांसी पर अगले आदेश तक रोक लगा दी थी कि अभी भी इनके कानूनी विकल्प पूरी तरह खत्म नहीं हुए।

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