ब्रेकिंग काशीपुर :टेलीकॉम कंपनी के नाम पर 67 लाख की ठगी में तीन गिरफ्तार, पूरे देश में 27 करोड़ से अधिक की ठगी कर चुके हैं :एस एस पी ने किया खुलासा, ठगी की सनसनीखेज दास्तान

67 लाख की ठगी में गिरफ्तार अभियुक्त और पुलिस टीम 

काशीपुर । नामी टेलिकॉम कंपनी के नाम पर व्यापारियों से 67 लाख रुपये की ठगी करने के मामले में पुलिस ने तीन लोगों को गिरफ्तार कर लिया। अभी तीन नामजद आरोपी पुलिस की पकड़ में नहीं आये हैं। 

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक दिलीप सिंह कुंवर ने आज काशीपुर एएसपी कार्यालय में इस ठगी के मामले का खुलासा करते हुए बताया कि गिरफ्तार किये लोगों से पूछताछ में कई चौंकाने वाले खुलासे निकले हैं। इनका नेटवर्क पूरे देश के कई राज्यों में चल रहा था। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक यह लोग अब तक देश के विभिन्न स्थानों से 27 करोड़ रुपये की ठगी कर चुके हैं। पकड़े गये अभियुक्तों में अश्वनी और विनोद राय टेलिकॉम कपंनी में उच्च पदों पर काम कर चुके हैं। इसलिए इनके पास टेलीकॉम कंपनी के बारे में पूरा अनुभव था जिसका लाभ उठाकर इन्होंने कई लोगों के साथ ठगी की। 

गिरफ्तार किये लोगों में अश्वनी कुमार पुत्र सुरेश चौबे निवासी ग्राम हरनिचक थाना बेऊर जिला पटना बिहार, विनोद राय पुत्र बलराम राय, निवासी ग्रेटर नोएडा गाजियाबाद, प्रशांत संगल पुत्र नंद कुमार संगल निवासी पुष्प बिहार नेहरू कालोनी देहरादून हैं। 

एसएसपी ने बताया कि पुलिस ने नामजद अमियुक्तों अश्विनी कुमार, निखिल गांधी, विवेक शर्मा, प्रशांत संगल को पूछताछ के लिए थाने लाया गया। पूछताछ में विनोद राय निवासी ग्रेटर नोएडा गाजियाबाद का नाम भी सामने आया। उन्होंने बताया कि अश्विनी कुमार  विनोद राय को कंपनी का सीईओ बताकर लोगों से मिलवाता था। यही नहीं इन दोनों के द्वारा कंपनी के कई शोरूम का उद्घाटन भी किये गये थे। ये लोग इतने शातिर थे कि इनके पास कंपनी के लोगो लगे उपकरण भी होते थे ताकि उन्हें दिखाकर ये ठगे जाने वाले लोगों को कंपनी का अधिकारी होने का भरोसा दिला देते थे। इनक मुख्य कार्यालय पश्चिम बंगाल के कलकत्ता में बनाया गया था जहाँ से ये पैसे का लेनदेन करते थे। 

एस एस पी श्री कुंवर ने बताया कि ग्राहकों से जो पैसा लिया जाता था वह प्रशांत संगल के खाते में डलवाया जाता था। बाद में प्रशांत संगल अपने खाते से अन्य सदस्यों के खाते में डाल देता था। एस एस पी ने बताया कि अभी इस मामले में और विवेचना जारी है।

ठगी की पूरी कहानी 

कचनाल गाली, विनायक विला निवासी मनोज जैन ने पुलिस को दी तहरीर में कहा कि उसके रुद्रपुर निवासी राजेश झाम से आपसी संबंध हैं। राजेश ने 20 जुलाई को एक व्यवसायिक डील करने के लिये उसे रुद्रपुर बुलाया। जहां राजेश ने उसे एक होटल में अश्वनी कुमार और उसके साथियों से मिलवाया। अश्वनी ने अपने को टेलीकॉम कंपनी को ईस्ट एंड सेंटर जोन का प्रोजेक्ट हेड बताया। उसके साथियों में हरिद्वार निवासी सुजेना शुक्ला, स्वाति कांडपाल, निखिल गांधी व विवेक शर्मा शामिल थे। जिन्होंने अपने को कंपनी अधिकारी और कर्मचारी बताया। उन्होंने कंपनी का ब्रॉडकास्टिंग वायरलेस स्मार्ट बॉक्स दूसरा ऑनलाइन मनी और तीसरा प्लान ऑनलाइन शॉपिंग बताया। कहा कि कंपनी स्टूडियो भी बनाकर देगी। जिसका किराया कंपनी देगी और इसमें छह चैनल होंगे। कहा गया कि उन्हें डेढ़ लाख बॉक्स जिनकी कीमत 4.50 करोड़ होगी दिये जाएंगे। जिसका 25 प्रतिशत एडवांस कंपनी में जमा करना होगा। इस पर दोनों ने हामी भर दी। इस पर उन्होंने काशीपुर आकर कंपनी बनाने का निर्णय लिया। जिसके स्वामी शक्ति प्रकाश, राजेश झाम व मनोज जैन होंगे। इसी बीच उनकी अश्वनी से बात होती रही। उसने कहा कि एग्रीमेंट से पहले वायरलैस मीडिया ब्रॉडकास्टिंग कंपनी के खाते में 5.51 लाख रुपये जमा करने होंगे। इस पर उन्होंने 23 जुलाई को रुपये जमा करा दिये। 29 जुलाई को अश्वनी ने निखिल गांधी और विवेक शर्मा को काशीपुर भेजा। जो कंपनी के लोगो लगे हुए पेपर और कंपनी की मोहरें लेकर आये।

उन्होंने पेपरों पर एग्रीमेंट लिखकर उसके और उसके पार्टनरों के हस्ताक्षर कराये और कंपनी के उच्चाधिकारियों के हस्ताक्षर कराने की बात कहकर एग्रीमेंट अपने साथ ले गये। इसके बाद कथित कंपनी अधिकारियों ने अलग-अलग तारीखों में कुल 67 लाख 26 हजार रुपये नकद व खातों में जमा करवा लिये। बाद में जब आरोपियों से कंपनी का अधिकृत पत्र दिखाने को कहा तो उन्होंने नहीं दिखाया। जब कंपनी से डील की जानकारी ली गई तो कंपनी ने बताया कि उनकी ऐसी कोई स्कीम नहीं है। कहा कि अश्वनी, सुजेना शुक्ला, स्वाति कांडपाल, निखिल गांधी, विवेक शर्मा, प्रशांत संगल आदि ने उसके और उसके पार्टनरों के साथ षड्यंत्र के तहत धोखाधड़ी की है।  तहरीर के आधार पर छह आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी समेत अन्य धाराओं में केस दर्ज किया गया था।

 

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