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प्रसंगवश : देशव्यापी लॉकडाउन में आखिर चूक कहां पर हुई?तस्वीरें भयावह हैं मौजूदा हालात में

-वेद भदोला

मौत का भय दिखाकर ही किया था न लॉकडाउन। अब देख लो इन्हें न मौत का भय है और न तुम्हारे लॉकडाउन की चिंता। इधर, व्हाट्सएप्प पर एक जोक चल रहा है कि अगर जोरदार भूकंप आ जाये तो आप जान बचाने के लिये घर से निकलकर भागेंगे या कोरोना के भय से घर पर ही रहेंगें। जाहिर है मेरा जवाब भी यही होगा कि घर से दूर भागेंगे। क्योंकि मैं भी मानवीय गुणों के तहत पहले संभावित खतरे पर ही प्रतिक्रिया करूंगा, जो स्वाभाविक भी है।

सरकार के लॉकडाउन की मैनें भी खुलकर प्रशंसा की थी। तब मेरा ये मानना था कि संभवतः लॉकडाउन का ये कदम तीसरे चरण में कोविड-19 यानि कोरोना की भयावहता को कमजोर कर देगा। फिलहाल भारत कोरोना के तीसरे चरण में प्रवेश कर चुका है। हालात आपके सामने हैं। सोशल डिस्टेसिंग (Social distancing) को नकारती तस्वीरें सारा राष्ट्र ही नहीं समूचा विश्व देख रहा है।

क्या वजह है कि केंद्र सरकार की राहतों और दिल्ली सरकार के रहने (रैन बसेरे) और खाने-पीने के तमाम उपायों के बाद भी कोई व्यक्ति कोरोना के खतरे के बीच अपने परिवार को लेकर हजारों किलोमीटर की दूरी नापने को तैयार है। इस पर ये सवाल उठता तो है ही कि क्या सरकार ने इन मुद्दों का गहराई से अध्ययन किये बिना ही लॉकडाउन की घोषणा कर दी। हालांकि, जो स्थिति आज दिख रही है उसके हिसाब से तो जवाब ये बनता है कि सरकार को समय सीमा तय कर लॉकडाउन की घोषणा करनी चाहिये थी।

इस मामले पर सरकार की तरफ से अब प्रतिक्रिया आयी है। सूचना और प्रसारण मंत्रालय की तरफ से जारी बयान में कहा गया है,” सरकार ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की तरफ से सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित करने से पहले ही देश की सीमाओं पर कम्प्रीहेंसिव रिस्पॉन्स सिस्टम लागू कर दिया था। साथ ही मंत्रालय ने कहा है कि 30 जनवरी को भारत में कोरोनावायरस के पहले मामले का पता चलने से बहुत पहले 18 जनवरी से ही चीन और हांगकांग से आने वाले अंतर्राष्ट्रीय यात्रियों की थर्मल स्क्रीनिंग की जा रही थी। वहीं इटली और स्पेन जैसे देशों ने थर्मल स्क्रीनिंग की शुरुआत पहले केस आने के 25 और 39 दिनों बाद की थी। मंत्रालय की तरफ से कहा गया है कि देश के 30 एयरपोर्ट और 12 बंदरगाहों पर भी स्क्रीनिंग की जा रही थी।

पिछले 24 घंटों में (सुबह 10 बजे तक) करोना के 194 नये मामले दर्ज किये गये हैं। चूंकि तीसरा चरण चल रहा है, तो कल हो सकता है कि इससे कहीं अधिक मामले दर्ज हों। लेकिन सवाल इन तस्वीरों को देखकर ये सवाल उठेगा ही कि आखिर चूक कहां हुई।

*लेखक शब्ददूत.कॉम के ब्यूरो प्रमुख हैं।

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