पते की बात : कंप्यूटर साइंस क्यों नहीं है उत्तराखंड में अनिवार्य विषय, एक सार्थक सवाल?

लेखक डॉ पुनीत कुमार वर्मा

कंप्यूटर  साइंस जैसे अतिमहत्वपूर्ण विषय को उत्तराखंड के सरकारी हाईस्कूल/इंटरमीडिएट स्तर के कॉलेजों में नियमित विषय के रूप में स्थापित नहीं किया गया है। कंप्यूटर साइंस विषय को नियमित विषय के रूप में मान्यता देते हुए स्थाई पदों की स्वीकृति प्रदान की जाय। दरअसल निजी कालेजों में कंप्यूटर साइंस की शिक्षा दी जाती है लेकिन उन कालेजों में फीस इतनउ अधिक होती है कि आर्थिक रूप से कमजोर छात्र वहाँ शिक्षा प्राप्त नहीं कर पाते । ऐसे में उत्तराखंड सरकार द्वारा कंप्यूटर साइंस विषय को हाईस्कूल/इंटरमीडिएट विद्यालयों में नियमित विषय के रूप स्थापित किया जाएगा तो मध्यमवर्गीय/गरीब तबके के विद्यार्थियों  को भी आसानी से इस विषय की पढाई करना सरल हो जाायेगा।  अगर कंंप्यूटर साइंस विषय को अनिवार्य/नियमित विषय के रूप में मान्यता प्रदान की जाती है तो, उत्तराखंड के सरकारी हाईस्कूल/इंटरमीडिएट विद्यालयों में लगातार कम हो रही छात्र संख्या में रोक लगेगी और निश्चित ही छात्र संख्या बढेगी। 

गौरतलब है कि उत्तराखंड से प्रतिवर्ष 35000 छात्र केवल कंंप्यूटर साइंस विषय से बीसीए/ एमसीए / बी टेक (CS / IT) /एम टेक (CS / IT) / B. Sc (CS / IT) / M. Sc (CS / IT) /PGDCA/PGDIT आदि की डिग्री/डिप्लोमा/परास्नातक/सर्टिफिकेट कोर्स करके निकल रहा है, जिनकी पिछले 20 वर्षों में संख्या लगभग 9 लाख हो चुकी है, किंतु इनके लिए उत्तराखंड में कोई भी रोजगार की व्यवस्था नही है।  कंंप्यूटर साइंस विषय को उत्तराखंड के सरकारी हाईस्कूल/इंटरमीडिएट विद्यालयों में नियमित/अनिवार्य विषय के रूप में मान्यता मिलती है तो हमारे ड्रीम प्रोजेक्ट ” डिजिटल इंडिया / कौशल विकास ” कार्यक्रम को भी एक बहुत मजबूत आधार मिलेगा।  उत्तराखंड के सभी सरकारी विद्यालयों में इंफ्रास्ट्रक्चर के नाम पर कंंप्यूटर कक्ष / 6 कंंप्यूटर सेट / 1 प्रिंटर सेट / 1 स्कैनर सेट / 1 प्रोजेक्टर सेट रखे गए हैं। जहाँ बिजली नहीं है वहां जेनरेटर सेट तक रखे गए हैं जिनके लिए प्रतिमाह 30 लीटर डीज़ल की भी व्यवस्था की गयी है, छात्र हैं, इंफ्रास्ट्रक्चर है, किन्तु उसको पढ़ाने और समझाने के लिए कंंप्यूटर प्रशिक्षित नियमित अध्यापकों की कोई भी व्यवस्था नहीं होने के कारण समस्त कंंप्यूटर उपकरण धूल खा रहे हैं या खराब हो चुके हैं।

कई वर्षों से कहा जाता है कि “पहाड़ का पानी और पहाड़ की जवानी” पहाड़ के काम नहीं आ पाता है, कैसे आएगा ? जब उनके लिए पहाड़ो में कोई भी रोजगार की व्यवस्था ही नहीं होगी, जबकि अगर उत्तराखंड के कंप्यूटर प्रशिक्षित बेरोजगारों की बात की जाय तो ये संख्या 35000 प्रतिवर्ष है जो कि पिछले 20 वर्षों में 9 लाख हो चुकी है। स्थाई कंंप्यूटर साइंस प्रशिक्षित अध्यापकों की नियुक्ति न होने के कारण उत्तराखंड माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के वार्षिक बोर्ड मूल्यांकन में देखा गया कि इनफार्मेशन टेक्नोलॉजी की 3000 कापियों को भौतिक विज्ञान के अध्यापकों के द्वारा मूल्यांकित करवाया गया, जबकि एजुकेशनल मैन्युअल के नियमानुसार हाईस्कूल/इंटरमीडिएट की कापियों को संबंधित विषय का ही स्नातक/परास्नातक अध्यापक ही जाँचने के लिए सक्षम माना जाता है। वर्तमान में फिजिक्स / केमिस्ट्री / मैथमेटिक्स वाले अध्यापकों को 15 दिन का कंंप्यूटर प्रशिक्षण देकर उनसे कंंप्यूटर साइंस विषय पढाने के लिए कहा जाता है जो कि सरकारी धन का दुरुपयोग मात्र है। जिसके परिणाम स्वरुप फिजिक्स / केमिस्ट्री / मैथमेटिक्स वाले अध्यापक ना तो अपना मूल विषय पढा पा रहा है और कंंप्यूटर विज्ञान विषय की तो उनमें समझ तक नहीं आ पाती है। संंबंधित विद्यालय में पढ़ने वाले छात्रों का नुक्सान हो रहा हैै। परिणाम स्वरुप सरकारी विद्यालयों में लगातार छात्र संख्या घट रही है, जबकि दूसरी ओर उत्तराखंड में 9 लाख प्रशिक्षित कंंप्यूटर ग्रेजुएट बेरोजगार घूम रहे हैं।

राज्य के विभिन्न विभागों में कार्यरत अधिकारियों / कर्मचारियों को समय-2 पर कंंप्यूटर प्रशिक्षण देने में वाह्य एजेंसियों को सरकारी व्यय पर अनुुबंधितत किया जाता है, जबकि यही कार्य हाईस्कूल/इंटरमीडिएट स्थाई कंंप्यूटर साइंस अध्यापकों के द्वारा निःशुल्क लिया जा सकता है. जिससे उत्तराखंड सरकार के धन की भी बचत होगी। कंंप्यूटर साइंस के स्नातक/परास्नातक कंप्यूटर साइंस विषय के अतिरिक्त हाईस्कूल / इंटरमीडिएट कक्षाओं के छात्रों को इंग्लिश/गणित आदि विषय पढाने में भी सक्षम होते हैं, जिससे कि उत्तराखंड के सुदूर स्थित विदयालयों में उपरोक्त विषयों के अध्यापकों की कमी को प्रशिक्षित कंप्यूटर स्नातक/परास्नातकों की स्थाई नियुक्ति द्वारा पूरा किया जा सकता है।

उत्तराखंड के समस्त ब्लॉकों में स्थित हाईस्कूल/इंटरमीडिएट विद्यालयों में कंप्यूटर साइंस की सुसज्जित प्रयोगशाला अत्याधुनिक उपकरणों के साथ बनाई गई हैं, किन्तु स्थाई प्रशिक्षित कंप्यूटर स्नातक/परास्नातक अध्यापकों के अभाव के कारण समस्त कंप्यूटर उपकरण धूल खा रहे हैं या खराब हो चुके हैं।। भारत के अधिकतर विकसित एवं विकासशील राज्यों (गुजरात / राजस्थान / मध्य प्रदेश / हरियाणा / आन्ध्र प्रदेश / केरल / उत्तर प्रदेश / गोवा / नई दिल्ली / नार्थ ईस्ट के सभी 7 हिमालयी राज्य आदि ) में कंप्यूटर साइंस अनिवार्य/नियमित विषय के रूप में स्थापित है किन्तु 20 वर्ष बीत जाने के उपरांत भी उत्तराखंड में इस विषय को अनिवार्य/नियमित विषय के रूप में मान्यता नहीं दी गई है।

ऐसा भेदभाव उत्तराखंड से क्यूँ हो रहा है ? जबकि कक्षा 9 से 12 तक प्रतिमाह प्रति छात्र रूपये 10/- कंप्यूटर शिक्षा शुल्क उत्तराखंड सरकार पिछले 20 वर्षों से सरकारी विद्यालयों से ले रही है। जब शुल्क लिया जा रहा है तो स्थाई विषय एवं स्थाई अध्यापक कि व्यवस्था से सरकारी स्कूल के छात्रों को वंचित क्यूँ रखा जा रहा है ?  उत्तराखंड के सरकारी हाईस्कूल/इंटरमीडिएट कॉलेजों कंप्यूटर साइंस विषय को अनिवार्य/नियमित विषय के रूप में स्थापित कर  स्थाई पदों के पद सृजित किये जायें तो उत्तराखंड में लगातार बढ़ रहा पलायन रुकेगा और उत्तराखंड के पानी के साथ-साथ उत्तराखंड की जवानी भी देश एवं उत्तराखंड के विकास में उत्तराखंड को सहयोग कर सके।

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